शनिवार, 4 जुलाई 2026

नजरिया जीने का: दूसरों के सोशल साइट स्टेटस देखकर अपने घर की सुख शांति नहीं खोएं


आज के डिजिटल युग में एक चलन सा बन गया है जहां हम अपने दैनिक गतिविधियों और सामाजिक व्यस्तताओं को सोशल सोशल साइट पर स्टेटस का अपडेट करना जीवन के एक फैशन बन चूका है. अगर सिर्फ अपडेट करना और अपने चाहने वालों को बताना हीं लक्ष्य होता तो यहाँ तक ठीक है, लेकिन विडम्बना यह है कि हम दूसरों के स्टेटस और उनके अपडेट देखकर अपनी घरों की सुख शांति को बर्बाद कर आग लगा रहे होते हैं. 

जाहिर है, आप खुद के घरों के शांति के लिए दूसरों के स्टेटस और अपडेट को जिम्मेदार नहीं बता सकते, लेकिन आप अपनी घरों की सुख और शांति के लिए कारण तो बन सकते हैं. दोस्तों  भले हीं आपको यह विषय निरर्थक और अप्रासंगिक लगे, लेकिन अगर आप विचार करेंगे तो पाएंगे की आज लोग खासतौर पर महिलायें इस गंभीर बीमारी से ग्रसित हो कर खुद अपनी और अपने घर की मानसिक  शांति को भंग कर रही है. 

कहने की जरुरत नहीं है कि आज व्हाट्सएप, फेसबुक जैसे सोशल साइट्स पर अपने स्टेटस को डालना और दूसरों के अपडेट  को देखना हमारे रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा बन चुका है। निश्चित हीं इस प्रकार की स्टेटस और अपडेट डालना कोई गलत नहीं क्योंकि  आज के समय में आखिर  अपनी भावनाएं, विचार, खुशियाँ और कभी-कभी दुख भी स्टेटस के रूप में शेयर से हम अपनों के साथ जुड़े भी रहते हैं. लेकिन क्या बात सिर्फ इतनी सी सीधी और सहज है? 

दूसरों के स्टेटस से खुद को जोड़ना गलत

 आप चाहें तो खुद की मानसिक स्थिति या खास तौर पर महिलाओं के स्टेटस अपडेट पर प्रतिक्रिया को देखेंगे तो पाएंगे कि कई बार हम किसी का स्टेटस देखकर अनावश्यक रूप से परेशान या असुरक्षित महसूस करने लगते हैं, जो हमारी मानसिक शांति के लिए बेहद हानिकारक साबित होता है।हम किसी के स्टेटस को देखकर सोच लेते हैं कि वह हमारे लिए ही कुछ कहना चाहता है जबकि कोई खास व्यक्ति अपने गतिविधियों या किसी आयोजन को लेकर सिर्फ अपडेट मात्र करता है लेकिन विडम्बना यह है कि हम ईर्ष्यालु पोस्ट समझकर खुद की मानसिक शांति को ख़राब करते हैं. जबकि असलियत में वह किसी और परिस्थिति या मूड के तहत लिखा गया हो सकता है। हर बात को अपने ऊपर लेना आत्म-पीड़ा का कारण बनता है।

मानसिक शांति दूसरे की स्टेटस से कहीं ज़्यादा कीमती 

अक्सर आप देखेंगे की जब कभी हम हम दूसरों के महंगे गिफ्ट, यात्रा या खुशियों से भरे स्टेटस देखते हैं, तो हम इस प्रकार से नहीं लेते जैसे की उसने सिर्फ हमें अपना सुख वाला मोमेंट शेयर करते हुए अपनी खुशी बांटने की कोशिश की है. हमारे मन में उसे अपडेट या स्टेटस के प्रति खुद के में तुलना का भाव आने लगती है जो हमारे घर की सुख शांति और परिवार के अपने व्यक्तिगत सौहार्द को ख़राब करता है. तुलना हमेशा से गलत होता है और इसका असर हमेशा से ख़राब होता है अगर यह अपना नेचुरल भाव खो देता है. हम यह भूल जाते  हैं कि सोशल मीडिया सिर्फ दिखाने का मंच है, सच्चाई नहीं और यह सोच हमारे आत्मविश्वास और संतोष को कम करके अपने परिवार के अंदर की शांति को  ख़राब करती है. 

मानसिक अवसाद को बढ़ाती है 

कई बार किसी दूसरे के स्टेटस या  अपडेट हमें अनावश्यक रूप से गुस्सा, ईर्ष्या या दुख का भाव उत्पन्न करता है जो लगातार होने पर मानसिक रूप से अवसाद उत्पन्न करता है. लोग ऐसे स्थिति  खुद को असहाय समझने लगते  हैं और अपने ऊपर तरस खाना शुरू कर देते हैं. अक्सर ऐसे समय लोग खुद पर नियंत्रण खो देते हैं और बार-बार वह स्टेटस देखने लगते हैं। ऐसा करना अपने भावनात्मक स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है क्योंकि  जितना ध्यान उस पर देंगे, उतनी बेचैनी बढ़ेगी  आपकी मानसिक अशांति को बढ़ाएंगी. 

अपनी ऊर्जा का सद्युपयोग करें, गंवाएं नहीं 

हम इस कदर खुद से कट चुके हैं कि दिन के आरम्भ में  हम पहले अपने बारे में और अपने जरुरी कार्यों के  बारे में  नहीं सोचते जिसे प्राथमिकता दी जानी चाहिए. लेकिन दूसरों के स्टेटस और अपडेट को देखना हमने ज्यादा जरुरी प्रतीत होता है.  हम अपनी प्राथमिकताओं की अनदेखी कर दूसरों के स्टेटस पर प्रतिक्रिया देने में समय गंवाते हैं. जबकि सच्चाई यह है कि अगर हम वही ऊर्जा अगर हम सीखने, पढ़ने या खुद को सुधारने में लगाएँ, तो जीवन कहीं अधिक शांत और समृद्ध बन सकता है।


बुधवार, 17 जून 2026

नजरिया जीने का: कठिन समय से विचलित होना कायरों का काम है-ऐसे करें सामना

जीवन, जिसे हम अक्सर सरल मान लेते हैं, वास्तव में यह कोई 'फूलों का सेज' नहीं है। यह एक जटिल और निरंतर चलने वाली यात्रा है। इस सफ़र में कभी हम खूबसूरत वादियों से गुजरते हैं, जहाँ सब कुछ हसीन लगता है, तो कभी हमें मुश्किलों और चुनौतियों के ऊबड़-खाबड़ रेगिस्तान से भी दो-चार होना पड़ता है। 

लेकिन याद रखें, कठिन समय में मन का विचलित होना स्वाभाविक है, पर उसी क्षण आपका साहस आपकी पहचान बनाता है क्योंकि सच यही है कि  जीवन में जो तूफ़ान से नहीं डरते, वही आसमान पर राज करते हैं।

फ़र्क़ सिर्फ हमारे नज़रिए का होता है। कुछ लोग इन मुश्किल घड़ियों में टूटकर बिखर जाते हैं, जबकि कुछ लोग इन्हीं हालातों की तपिश से अपनी एक नई और मज़बूत पहचान गढ़ते हैं। 
याद रखें, कठिन समय आपको तोड़ने नहीं, तराशने आता है—ठीक उसी तरह जैसे पत्थर पर हथौड़े की चोट से सुंदर मूर्ति बनती है। जैसा कि एक मशहूर कहावत है:

"मुश्किलें दिल के इरादे आज़माती हैं, स्वप्न के परदे निगाहों से हटाती हैं। हौसला मत हार गिरकर ओ मुसाफ़िर, ठोकरें इंसान को चलना सिखाती हैं।"

यह संसार सिर्फ हमारे अकेले के लिए नहीं बना है। जीवन में सिर्फ अपने सुख-दुख तक सीमित रहना, जीवन के असली मर्म को समझने से चूक जाना है। जब हम दूसरों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास करते हैं, तभी हमारी यात्रा सार्थक होती है।

जब हालात आपके खिलाफ हों, तब ही आपकी असली क्षमता सामने आती है। वो कहते हैं ना, "मुश्किलें आपकी राह में इसलिए नहीं आतीं कि आप रुक जाएं, बल्कि इसलिए कि आप और मजबूत बनें।"

याद रखें, जीवन में दो हीं लोग असफल होते हैं - एक जो सोचते हैं पर करते नहीं, और दूसरे जो करते हैं पर सोचते नहीं। मतलब साफ़  है, कायर वही होते हैं जो डर का सामना करने से पहले ही हार मान लेते हैं, जबकि बहादुर वे हैं जो गिरकर भी उठना नहीं भूलते।

जीवन में कठिन समय का आना और जाना लगा रहता है; आप इससे बच नहीं सकते। ये चुनौतियाँ अनिवार्य हैं, लेकिन इनसे निपटने का आपका तरीका, आपकी सकारात्मक सोच (Positive Thinking) और आपका रवैया (Attitude) ही आपको इन मुश्किलों से बाहर निकाल सकता है।
आपका एटीट्यूड ही तय करता है कि आप उस मुश्किल को एक रुकावट के तौर पर देखते हैं या एक अवसर के तौर पर।
"सफलता खुशी की कुंजी नहीं है। खुशी सफलता की कुंजी है। यदि आप जो कर रहे हैं उससे प्यार करते हैं, तो आप सफल होंगे।" - अल्बर्ट श्वाइत्ज़र

जब आप मुश्किल समय से गुज़र रहे हों, तो दोस्तों और परिवार के साथ जुड़ना और अपने मन की बात साझा करना, तनाव को कम करने में मदद करता है। यह आपके मूड को बेहतर बनाता है और जीवन में आए अचानक बदलावों और व्यवधानों को समझने की शक्ति देता है।

हर व्यक्ति के जीवन में ऐसे दौर आते हैं जब सब कुछ उलझा हुआ और अंधकारमय लगता है। यह वह समय होता है जब हमें सबसे अधिक धैर्य की ज़रूरत होती है। 

जीवन में कठिन समय हर किसी के हिस्से आता है, लेकिन उससे टूट जाना समाधान नहीं है। जो लोग जीवन की चुनौतियों को साहस के साथ स्वीकार करते हैं, वही आगे बढ़ते हैं और सफलता का स्वाद चखते हैं।

यही समय हमारी असली ताकत और हमारे चरित्र का इम्तिहान होता है। जो व्यक्ति इस कठिन दौर में धैर्य बनाए रखता है, जो शांत रहकर सही निर्णय लेता है, वही आगे चलकर अनगिनत लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनता है।

"धैर्य एक कड़वा पौधा है, लेकिन इसके फल बहुत मीठे होते हैं।"

जीवन की इस यात्रा में, चाहे रास्ता कितना भी पथरीला क्यों न हो, अपनी उम्मीद की मशाल जलाए रखें। हर मुश्किल आपको सिखाने आई है, हराने नहीं। अपने एटीट्यूड को सही दिशा दें, अपनों का साथ लें और धैर्य रखें — आप न केवल इन मुश्किलों से पार पाएंगे, बल्कि एक बेहतर और मज़बूत इंसान बनकर उभरेंगे।


नजरिया जीने का: नई शुरुआत की कोई उम्र नहीं होती - बस इरादा चाहिए


अक्सर आपने सुना होगा कि " मन के हारे हार है, मन के जीते जीत." बात बहुत पुरानी है लेकिन आप विश्वास कीजिए कि पहले की कही गई मुहावरों या आज पहले की अपेक्षा अधिक प्रासंगिक है. जी हाँ,  यह हमारा मन ही होता है जो हमारे विचारों को गाइड करता है. शरीर के अवस्था पर किसी का वश नहीं होता लेकिन अगर आपने अपने मन को यूथ और ऊर्जावान बनाना सीख लिया फिर संसार की कोई ताकत आपको परास्त नहीं कर सकती।

विख्यात अभिनेता देव आनंद जिन्हे बॉलीवुड में एवरग्रीन युथ के नाम से जाना जाता है, जब उनकी मौत हुए तो देश के में लीडिंग अंग्रेजी पेपर का हैडलाइन था-"Dev Anand: The Evergreen Youth Died At 91"

हम अपने ऊपर अपने उम्र को हावी कर  खुद को उम्र के वास्तविक पड़ाव का आभास कराकर खुद को बुजुर्ग या हारा हुआ मान लेते  हैं जबकि सच्चाई यह है कि अक्सर  ज़िंदगी की सबसे खूबसूरत शुरुआत 50 या 60 की उम्र में होती है। 

आपको पता होनी चाहिए कि कर्नल सैंडर्स ने अपनी पहली KFC फ्रैंचाइज़ी 62 साल की उम्र में शुरू की थी  और आज KFC   दुनिया में किसीपरिचय की मोहताज नहीं है. 

गांधीजी ने 45 साल की उम्र के बाद भारत के स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा दी और अगर गांधीजी ने सोचा होता कि इस उम्र में कुछ हासिल नहीं  किया जा सकता तो, फिर कहानी कुछ और होती. 

अरुणा वासुदेवन आज जानी मानी यूटूबर हैं जिन्होंने 70 की उम्र में  कुकिंग चैनल शुरू किया — “Grandma’s Kitchen”का आरम्भ किया. 

सच्चाई यह है कि सपने देखने की कोई उम्र नहीं होती, बस हिम्मत करनी होती है उन्हें सच करने की. 

कहने का मतलब यह है कि जीवन का हर दौर कुछ नया सिखाता है बस शर्त यह है कि और अगर हम सीखने और आगे बढ़ने की इच्छा रखते हैं. शारीरिक अवस्था पर हमारा कुछ अधिकार नहीं होता और यह जीवन का सच्चाई है, लेकिन  वास्तविकता यह है कि अगर हम सोच में युवा हैं तो फिर शारीरिक अवस्था कभी बाधा बन भी नहीं सकती है. 

विख्यात अभिनेता देव आनंद जिन्हे बॉलीवुड में एवरग्रीन युथ के नाम से जाना जाता है, आप सहज  हीं अंदाजा लगा सकते कि देव आनंद साहब की युथ सोच का  क्या असर था  उनके चाहने वालों पर. 

विश्वास कीजिये, जीवन में मिला हर नया दिन एक मौका है, कुछ नया करने का, चाहे उम्र कुछ भी हो बस शर्त  यह है कि हमें सोच  युवा होनी चाहिए. 


नजरिया जीने का: सरदार वल्लभभाई पटेल-जीवन, शिक्षाएं और प्रेरणादायक विचार

सरदार वल्लभभाई पटेल का पूरा नाम वल्लभभाई झावेरभाई पटेल था जो आजाद भारत के पहले उपप्रधानमंत्री और गृह मंत्री थे. उनका जन्म 31 अक्टूबर 1875, नडियाद (गुजरात) में हुआ था. सरदार पटेल ने इंग्लैंड से कानून की पढ़ाई की और भारत लौटकर एक सफल वकील बने।सरदार पटेल को लोकप्रिय उपाधि  "भारत के लौह पुरुष (Iron Man of India) के नाम से जाना जाता है जो बारडोली सत्याग्रह (1928) में किसानों के अधिकारों के लिए उनके नेतृत्व के लिए उन्हें दी गई थी. 

सरदार पटेल के लिए राष्ट्र सेवा सर्वोपरि थी और इसके लिए उन्होंने व्यक्तिगत सुख-सुविधाओं की परवाह किए बिना जीवनभर देश की सेवा को प्राथमिकता दी।

वह पेशे से वकील, स्वतंत्रता सेनानी और राजनेता थे जो महात्मा गांधी के विचारों से प्रभावित होकर अपना पेशा छोड़कर स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया।

यह सरदार पटेल हीं थें जिन्होंने स्वतंत्रता के बाद  562 रियासतों का भारत में विलय कर भारत को एक राष्ट्र के रूप में प्रमुख भूमिका निभाई. 

सरदार पटेल अनुशासन और दृढ़ निश्चय के लिए जाने जाते हैं मानना था कि जीवन में सफलता पाने के लिए आत्म-अनुशासन और मजबूत इच्छाशक्ति आवश्यक है।

सरदार वल्लभभाई पटेल (Sardar Vallabhbhai Patel): प्रमुख कोट्स 

  • आम प्रयास से हम देश को एक नई महानता तक ले जा सकते हैं, जबकि एकता की कमी हमें नयी आपदाओं में डाल देगी।
  • जो तलवार चलाना जानते हुए भी अपनी तलवार को म्यान में रखता है उसी को सच्ची अहिंसा कहते है।
  • अविश्वास भय का प्रमुख कारण होता है।
  • इस मिट्टी में कुछ खास बात है, जो कई बाधाओं के बावजूद हमेशा महान आत्माओं का निवास बना रहा है।
  • "शक्ति के अभाव में विश्वास व्यर्थ है. विश्वास और शक्ति, दोनों किसी महान काम को करने के लिए आवश्यक हैं।"
  • मान-सम्मान किसी के देने से नहीं मिलते, अपनी योग्यतानुसार मिलते हैं।
  • हर भारतीय को अब भूल जाना चाहिए कि वह राजपूत, एक सिख या जाट है। उन्हें याद रखना चाहिए कि वह एक भारतीय है और उसके पास अपने देश में हर अधिकार है लेकिन कुछ कर्तव्यों के साथ।
  • कठिन समय में कायर बहाना ढूंढते हैं तो वहीं, बहादुर व्यक्ति रास्ता खोजते है।
  • अहिंसा को विचार, शब्द और कर्म में देखा जाना चाहिए। हमारी अहिंसा का स्तर हमारी सफलता का मापक होगा।
  • बोलने में मर्यादा मत छोड़ना, गालियाँ देना तो कायरों का काम है।
  • “धर्म के मार्ग पर चलो — सत्य और न्याय का पालन करो। अपनी स्वतंत्रता का दुरुपयोग मत करो, आत्म-अनुशासन बनाए रखो।”


“मनुष्यबल बिना एकता के शक्ति नहीं है; जब तक उसे सही ढंग से संगठित और एकजुट न किया जाए, वह आध्यात्मिक शक्ति नहीं बन सकता।”


“आस्था तब तक व्यर्थ है जब तक उसमें शक्ति न हो। महान कार्यों के लिए आस्था और शक्ति दोनों आवश्यक हैं।”


“कर्म ही पूजा है। अपने कर्तव्य को निष्ठा से करो, तभी सच्ची शांति और सुख मिलेगा।”


“मेरी केवल एक इच्छा है कि भारत एक अच्छा उत्पादक बने और कोई भी व्यक्ति भूख से आंसू न बहाए।”


“साहस भय का अभाव नहीं, बल्कि उस पर विजय पाने की शक्ति है।”


नज़रिया जीने का: हिंसा की जड़ है अहंकार और असहिष्णुता, इसका परित्याग करें

हिंसा से आज तक कभी किसी का भला नहीं हुआ और यह जीवन और संसार का यथार्थ है लेकिन यह हमारी बदकिस्मती है कि हम सभी जानते हुए भी इसे स्वीकार नहीं करते हैं। हिंसा केवल केवल मारपीट या युद्ध हीं नहीं है, बल्कि यह तो अंजान है हमारी हिंसक सोच और विचारों का जिसे हमने युवाओं के दिमाग में बोया है। 
भगवान बुद्ध ने कहा था:“घृणा कभी घृणा से नहीं मिटती, बल्कि केवल प्रेम से मिटती है। यही शाश्वत नियम है।” लेकिन यहीं तो हमारी बदकिस्मती है कि हम सभी इसे समझने को तैयार नहीं हैं।

सच्चाई यह है कि जब हम दूसरों के प्रति करुणा रखते हैं, तब हमारे भीतर शांति जन्म लेती है और यही शांति हमारे भटके हुए युवाओं को बतानेवाल की जरूरत है जिन्हें लगता है कि हिंसा हीं समाज में स्थिरता लाती है और यही सच्ची प्रगति की नींव है।

हाल के दिनों में जिस प्रकार से हिंसा अपने वीभत्स रूप में सामने दिखी है उसने यह साबित कर दिया है कि हिंसा का कोई भी रूप हो, उसका अंतिम परिणाम हमेशा विनाश ही होता है। चाहे वह घरेलू झगड़ा हो, राजनीतिक संघर्ष या धार्मिक टकराव — अंततः दोनों पक्ष हारते हैं। स्वामी विवेकानंद ने कहा था: “जिसने अपने ऊपर विजय पा ली, वही सबसे बड़ा विजेता है।”

अगर आप इतिहास पलट कर देखेंगे तो पाएंगे कि हिंसा की शुरुआत प्रायः तब होती है जब व्यक्ति अपने अहंकार या स्वार्थ को दूसरों पर थोपना चाहता है। जब भी हमारे बीच में सहिष्णुता समाप्त होती है, तब हिंसा जन्म लेती है।

रविवार, 1 मार्च 2026

नजरिया जीने का:असीमित सोच और विचारों को किसी सीमा से नहीं बांधे, ऊँचा सोचें और बड़ा लक्ष्य हासिल करें

 


नजरिया जीने का: अगर आप असीमित शब्द के सार्थकता को समझेंगे तो पाएंगे कि यह शब्द बहुत ही उपयोगी है क्योंकि यह आपको  विश्वास दिलाता है कि आप वह सब कुछ कर सकता हूं जो आप चाहते हैं। सच तो यही है कि यह आपकी असीमित सोच है जो आपके अंदर के विचारों को जागृत करता है और  संभावनाओं की याद दिलाता है, तब भी जब सारी परिस्थितियाँ मेरे विरुद्ध हों। असीमित सोच और असीमित विचारों पर विश्वास करके, आप असीमित चीजें हासिल कर सकते हैं हाँ इसके लिए पहल आपको हीं करनी होगी। 



सोचने की कोई सीमा नहीं है, इसलिए बड़ा सोचें और अपने जीवन में बड़ा हासिल करें क्योंकि हर व्यक्ति के अंदर अपार शक्ति है और हमें बस उसे प्रज्वलित करना है। प्रकृति ने हमें अपने जीवन में चमत्कार करने की अपार शक्ति और क्षमता प्रदान की है, लेकिन त्रासदी यह है कि हम दर्शक दीर्घा के बीच में फिट होने का आनंद लेते हैं। 


विडम्बना यह हैं कि प्रकृति ने तो हमें कोई भेदभाव नहीं किया हमें शक्ति और सामर्थ्य प्रदान करने में, लेकिन यह केवल हम ही हैं जो अपनी सोच को सीमा प्रदान करते हैं, इस तथ्य के बावजूद कि आपके पास इसे हासिल करने के लिए पर्याप्त शक्ति और ऊर्जा है।

आपके आस-पास होने वाली हर घटना को कुछ न कुछ सीमा प्रदान की गई है। चाहे वह सड़क हो, क्रेडिट/डेबिट कार्ड हो, आपका शरीर हो, आपके शरीर के अंग हों और यहां तक कि सभी अत्यधिक परिष्कृत और नवीनतम उपकरण हों, उनके उपयुक्त और मानक प्रदर्शन की अपनी सीमाएं हैं। 

यह केवल आपकी सोच है जिसकी कोई सीमा नहीं है और यह बहुत ऊपर तक जा सकती है क्योंकि आपके पास वास्तविक तर्क है और आपके संसाधन और दृष्टिकोण इसकी अनुमति देते हैं।

असीमित सोच:

हमारा दिमाग शारीरिक बाधाओं से बंधा नहीं है और हम चाहें तो हम वर्तमान और सीमाओं से परे कल्पना कर सकते हैं, अन्वेषण कर सकते हैं और सपने देख सकते हैं। यह केवल आपकी सोच है जिसकी कोई सीमा नहीं है और यह बहुत ऊपर तक जा सकती है क्योंकि आपके पास वास्तविक तर्क है और आपके संसाधन और दृष्टिकोण इसकी अनुमति देते हैं।

यह केवल हम ही हैं जो इस तथ्य के बावजूद कि आपके पास इसे हासिल करने के लिए पर्याप्त शक्ति और ऊर्जा है, अपनी सोच को सीमा प्रदान करते हैं। यह असीमित सोच हमें उन संभावनाओं पर विचार करने की अनुमति देती है जो पहली नज़र में संभव नहीं लगती हैं।


बड़ी सोच का महत्व:

प्रकृति ने हमें अपने जीवन में चमत्कार करने की अपार शक्ति और क्षमता प्रदान की है, लेकिन त्रासदी यह है कि हम दर्शक दीर्घा के बीच में फिट होने का आनंद लेते हैं। महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित करने से प्रेरणा मिलती है और हमें उत्कृष्टता के लिए प्रयास करने के लिए प्रेरित किया जाता है।

बड़ी सोच चुनौतियों का सामना करने में नवीनता, रचनात्मकता और लचीलेपन को बढ़ावा देती है। हमें ऊंचा सोचना चाहिए और अपनी सोच को नई ऊंचाइयां प्रदान करनी चाहिए, आश्चर्यजनक रूप से हम अखबारों और टीवी समाचारों में ऐसे चमत्कार रचने वालों से गुजरते रहते हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि ऐसे लोगों ने अपनी सोच को नई ऊंचाई प्रदान की है और अपने जीवन में बड़ा मुकाम हासिल किया है.


संतुलन महत्वपूर्ण है-

जबकि बड़ा सोचना महत्वपूर्ण है, लेकिन साथ हीं सुनिश्चित करना भी जरुरी है कि आपके लक्ष्य भी यथार्थवादी हों और आपके मूल्यों और संसाधनों के अनुरूप हों। अपने लक्ष्यों को प्राप्त करना महत्वपूर्ण है, सीखने, बढ़ने और उनके साथ तालमेल बिठाने की प्रक्रिया अत्यधिक मूल्यवान है। 

दुनिया में हर सफल शख्सियत ने तभी बड़ा हासिल किया है, जब उसने बड़ा सोचने का साहस किया। हमें एक मुर्ख और लापरवाह इंसान बनने की मानसिकता को बदलने के लिए तैयार रहना होगा न कि यह सोचना होगा कि प्रकृति ने हमें चमत्कार करने की सारी शक्ति और विचारों से सुसज्जित किया है।