रविवार, 10 अगस्त 2025

नजरिया जीने का: आचार्य चाणक्य के ये Quotes आपके नीरस जीवन मे जोश भर देंगे

 


आचार्य चाणक्य, जिन्हें कौटिल्य या विष्णुगुप्त के नाम से भी जाना जाता है, वह एक  प्राचीन भारत के महान विचारक, राजनीतिज्ञ और अर्थशास्त्री थे। वह अक्सर कहा करते थे कि धरती के वह वास्तविक राजा देंगे और उन्होंने चन्द्रगुप्त मौर्य के रूप मे एक विख्यात राज्य वंश का स्थापना किया। उन्होंने मौर्य साम्राज्य कि स्थापना से लेकर उसके कीर्ति पताका फहराने मे प्रमुख योगदान दिया है।  उनकी नीतियों और उक्तियों में गहरी जीवन-दृष्टि और व्यावहारिक ज्ञान छिपा हुआ है। 


आचार्य चाणक्य कि उक्तियाँ

  • अहंकार एकमात्र शत्रु है, यह व्यक्ति को स्वयं ही नष्ट कर देता है। 
  • कोई काम शुरू करने से पहले खुद से तीन प्रशन कीजिये - मै ये क्यों कर रहा हूँ, इसके परिणाम क्या हो सकते है और क्या मै सफल होऊंगा? और जब गहराई से सोचने पर इन प्रशनो के संतोषजनक उत्तर मिल जाए, तभी आगे बढ़िए | 
  • व्यक्ति अपने उद्देश्य के लिए बाधाओं को विनाश करना चाहिए, न कि बाधाएं अपने उद्देश्य को। 
  • सबसे बड़ा गुरु मंत्र - अपने राज़ किसी को भी मत बताओ ये तुम्हे ख़त्म कर देगा |
  • यदि तुम किसी को नियंत्रित करना चाहते हो, तो उसका ख्याल रखो कि तुम स्वयं नियंत्रित नहीं हो रहे हो।" 
  • कभी भी उनसे मित्रता मत कीजिए जो आपसे कम या ज्यादा प्रतिष्ठा के हो, ऐसी मित्रता कभी आपको खुशी नहीं देगी | 
  • स्व-अनुशासन रखो, दूसरों की बजाय अपनी गलतियों से सीखो।
  • आपकी बुद्धि आपकी शक्ति है। यह आपकी सबसे अच्छी दोस्त और नेमिश है। 
  • जीवन के तीन मंत्र - आनंद में वचन मत दीजिए, क्रोध में उतर मत दीजिये, दुःख में निर्णय मत लीजिए |
  • सेवक को तब परखे जब वह काम न कर रहा हो, रिस्तेदार को किसी कठिनाइ में, मित्र को संकट में और पत्नी को घोर विपत्ति में 
  • जो कुछ तुम्हारे पास है, उसे अच्छे से उपयोग करो। जो कुछ तुम्हारे पास नहीं है, उसे प्राप्त करने के लिए काम करो।
  • जब तक तुम डरते रहोगे तुम्हारे जिंदगी  के फैसले कोई और लेता रहेगा 
  • सत्य, क्षमा, सम्मान, स्वाधीनता, न्याय - ये आदर्श एक समान्य व्यक्ति के लिए सबसे बड़ी संपत्ति हैं। 
  • शत्रु की दुर्बलता जानने तक उसे अपना मित्र बनाए रखे |
  • आदमी अपने जन्म से नहीं अपने कर्मो से महान होता है 
  • व्यक्ति को हमेशा धीमे आदेश दो, क्योंकि वह उन्हें अच्छी तरह से पालन करेगा। 
  • निरंतर प्रयास करो और उद्यमिता बरतो। इसे नशा कहो, नहीं तो इसमें नष्ट हो जाओगे। 
  • मैदान में हारा हुआ फिर से जीत सकता है परन्तु मन से हरा हुआ कभीजीत नहीं सकता | आपका आत्मविश्वास ही आपकी सर्वश्रेश्ठ पूंजी है | 
  • अगर शत्रु में भी गुण दिखे तो उन्हें अपना लेना चाहिए |
  • मुर्ख लोगो से वाद-विवाद नहीं करना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से हम अपना ही समय नष्ट करते है | 
  • दुर्गुण से चाहने वाला सदैव दुर्गुणों में ही रहता है। 
  • "एक अच्छे राजा का सबसे बड़ा गुण उसकी बुद्धि है."
  • "एक देश की शक्ति उसकी सेना में नहीं, बल्कि उसकी जनता में होती है."
  • "एक मजबूत अर्थव्यवस्था एक मजबूत राष्ट्र की नींव है."
  • "शिक्षा एक राष्ट्र के विकास का सबसे महत्वपूर्ण कारक है."
  • "सच्चाई और न्याय ही एक अच्छे समाज की नींव है."
  • ईमानदारी से जीवन जीने वाला व्यक्ति हमेशा सम्मान पाता है।
  • सच्चाई से बड़ा कोई धर्म नहीं है।
  • धैर्य से ही व्यक्ति कठिनाइयों को पार कर सकता है।
  • सही मित्र का चयन व्यक्ति के जीवन को खुशहाल बनाता है।
  • शत्रु से सतर्क रहना चाहिए।
  • समय का सदुपयोग ही सफलता की कुंजी है।
  • ज्ञान सबसे बड़ी संपत्ति है।
  • शिक्षा सबसे अच्छी मित्र है। शिक्षित व्यक्ति हर जगह सम्मान पाता है। शिक्षा सौंदर्य और जवानी को परास्त कर देती है।
  • सही समय पर किया गया कार्य सफलता की कुंजी है।
  • मनुष्य अपने भाग्य का निर्माण स्वयं करता है। सही समय पर लिया गया निर्णय जीवन बदल सकता है।
  • दूध के साथ विष मिला हो तो उसे तुरंत त्याग देना चाहिए। उसी प्रकार बुरे व्यक्ति और मित्र को भी छोड़ देना चाहिए।
  • धन का संग्रह इस प्रकार करें जैसे चींटी अपनी खुराक के लिए करती है। परिश्रम और बचत का महत्व समझें।
  • धन उसी का है जो उसका उपयोग सही कार्य में करता है।"
  • एक बुद्धिमान व्यक्ति को दूसरों के दोषों पर ध्यान नहीं देना चाहिए।"
  • दुष्ट व्यक्ति और सांप में अंतर है। सांप केवल तभी काटेगा जब वह खतरा महसूस करेगा, लेकिन दुष्ट व्यक्ति हर समय दूसरों को नुकसान पहुंचाने की सोचता है।
  • घर वही है जहाँ महिला सम्मानित हो। जहाँ महिला का सम्मान नहीं होता, वह घर नरक के समान है।
  • कोई भी कार्य कठिन नहीं है यदि उसे छोटे-छोटे चरणों में किया जाए।"
  • कठिन समय में व्यक्ति को धैर्य और संयम से काम लेना चाहिए। यही सफलता का मूलमंत्र है।
  • कभी भी अपने रहस्यों को किसी और के साथ साझा मत करें। यह आदत आपको नष्ट कर सकती है।
  • दुश्मन को कभी कमजोर न समझें। वह छोटी सी चिंगारी भी बड़ा विस्फोट कर सकती है।
  • अपना मन शांत रखें। मन की शक्ति सबसे बड़ी शक्ति है।
  • जो व्यक्ति अपने मन पर नियंत्रण नहीं कर सकता, वह जीवन में सफल नहीं हो सकता।
  • एक मूर्ख से बहस करने का मतलब है कि आप भी मूर्ख हैं।
  • जो समय के साथ नहीं बदलता, वह नष्ट हो जाता है।


बुधवार, 16 जुलाई 2025

नजरिया जीने का; सौंदर्य और कुरुपता के धोखे से निकलना सीखे

जिब्रान की एक बड़ी प्रीतिकर कहानी है कि संसार के जन्म के समय परमात्मा ने जब सब बनाया, तब उसने एक सौंदर्य की देवी और एक कुरूपता की देवी भी बनायी। उन दोनों को उसने पृथ्वी पर भेजा। मार्ग लंबा है आकाश से पृथ्वी तक आने का। धूल से भर गए उनके वस्त्र, उनके शरीर-लंबी यात्रा थी। तो वे दोनों एक झील के किनारे उतरीं, और स्नान करने को झील में उतरीं। दोनों ने अपने कपड़े बाहर रख दिए, झील के किनारे। कोई था भी नहीं आसपास। दोनों नग्न हो कर झील में स्नान किए। सौंदर्य की देवी तैरती हुई दूर तक निकल गयी। तभी कुरूपता की देवी बाहर निकली। उसने सौंदर्य की देवी के कपड़े पहन लिए और भाग खड़ी हुई। जब सौंदर्य की देवी ने पीछे लौट कर देखा तो वह बड़ी हैरान हुई। देखा कि कपड़े तो जा चुके।

सुबह हुई जा रही थी, गांव के लोग जगने लगे। और आसपास लोगों के आने-जाने की चहलकदमी शुरू हो गयी। मजबूरी में सौंदर्य की देवी को कुरूपता के वस्त्र पहन लेने पड़े।

और जिब्रान ने कहा है, "तब से सौंदर्य की देवी कुरूपता की देवी के वस्त्र पहने घूम रही है। और कुरूपता की देवी सौंदर्य के वस्त्र पहने घूम रही है। ऐसा ही कुछ हुआ है।"

दुख सुख के वस्त्र पहने हुए घूम रहा है।
असत्य सत्य के वस्त्र पहने हुए घूम रहा है। और मन वहीं धोखा खा जाता है।

श्रोत:ओशो;
एक ओंकार सतनाम ~ प्रवचन-20

सोमवार, 14 जुलाई 2025

गुरु वह शक्ति है जो अज्ञानता के अंधकार से निकालकर ईश्वर की ओर ले जाती है-संजीव कृष्ण ठाकुर


संजीव कृष्ण ठाकुर जी ने अपने प्रवचन में कहा, "गुरु वह शक्ति है जो शिष्य को अज्ञानता के अंधकार से निकालकर ईश्वर की ओर ले जाती है।" उन्होंने संत सहजो बाई का उल्लेख करते हुए कहा कि "गुरु का स्थान ईश्वर से भी ऊपर है, क्योंकि ईश्वर तो कर्म के अनुसार फल देता है, लेकिन गुरु कृपा से भाग्य भी बदल सकता है।"

गुरुपूर्णिमा के पावन अवसर पर दिल्ली में एक भव्य आध्यात्मिक सत्संग और गुरु महिमा समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर वृंदावन से पधारे विश्वविख्यात संत संजीव कृष्ण ठाकुर जी ने उपस्थित श्रद्धालुओं को गुरु महिमा का महत्व समझाते हुए भागवत गीता के कई प्रसंगों के माध्यम से जीवन मूल्यों और गुरु-शिष्य परंपरा की दिव्यता का सन्देश दिया।

इस मौके पर मौजूद अतिथियो में समाजसेवी व उद्धोगपति रमेश कपूर, वरिष्ठ कांग्रेस नेता शम्भू शर्मा, ज्ञानेश्वर सिंह SHO, बीजेपी बाहरी दिल्ली जिलाध्यक्ष रामचंद्र चावरिया,  विधायक राजकुमार चौहान, निगम पार्षद धर्मबीर शर्मा, बिश्व हिंदू परिषद के जिलाध्यक्ष दिनेश शर्मा,  ट्रांसजेंडर समुदाय से कमलेश, ललिता नायक, दीपचंद्र, अदीप सेतिया, अशोक शर्मा, अमित पूरी, पण्डित भोला नाथ शुक्ला, , अर्चना शुक्ला, अंशु अग्रवाल, अमर अग्रवाल, नीरज जैन, पण्डित कृष्ण शास्त्री, आचार्य प्रेम शर्मा, समाजसेवी अंजू शर्मा व राजकमल शर्मा, प्रोड्यूसर राजेश्वरी सिंह, मनोज अग्रवाल, अंकित शर्मा, विकास शर्मा, सुमित मलिक, फूलचंद अलोरिया, लक्ष्य पण्डित, अमन परवाना, मनप्रीत कौर आदि प्रमुख थे।

विश्व शांति व मानवता के दूत के रूप में सम्मान

इस अवसर पर वर्ल्ड ह्यूमन राइट्स ऑर्गेनाइजेशन (WHRO) की ओर से संत संजीव कृष्ण ठाकुर जी को "ग्लोबल पीस एंड ह्यूमिनिटी अवॉर्ड 2025" से सम्मानित किया गया। ऑर्गेनाइजेशन के चेयरमैन योगराज शर्मा ने ठाकुर जी को यह सम्मान एक स्मृति चिन्ह और शाल ओढ़ाकर प्रदान किया।

योगराज शर्मा ने अपने उद्बोधन में कहा, "संजीव कृष्ण ठाकुर जी न केवल अध्यात्म के क्षेत्र में अपितु मानवता, प्रेम और करुणा के प्रचारक के रूप में भी वैश्विक स्तर पर एक प्रतिष्ठित व्यक्तित्व हैं। उनकी वाणी और जीवन-दर्शन में आज के समाज के लिए मार्गदर्शन है।"

आयोजक और अन्य सम्मान

कार्यक्रम के आयोजक अरुण शर्मा 'लक्की हिंदुस्तानी' ने मंच पर उपस्थित सभी विशिष्ट अतिथियों, संतों और साधकों का स्वागत और सम्मान किया। इसी कार्यक्रम में WHRO दिल्ली राज्य के चेयरमैन के रूप में अरुण शर्मा को भी औपचारिक रूप से नियुक्त किया गया और सम्मान प्रदान किया गया।

संजीव कृष्ण ठाकुर जी का जीवन और अध्यात्म यात्रा

संजीव कृष्ण ठाकुर जी का जन्म वृंदावन की पावन भूमि में हुआ। बाल्यकाल से ही ठाकुर जी में अध्यात्म और भक्ति के प्रति विशेष रुचि थी। उन्होंने श्रीमद्भागवत, गीता और वेद-पुराणों का गहन अध्ययन किया। ठाकुर जी अपने प्रवचनों में प्रेम मार्ग और मानव सेवा को ही सर्वोच्च धर्म बताते हैं।

संजीव कृष्ण ठाकुर जी ने अब तक देश-विदेश में हजारों कथा, सत्संग और भागवत सप्ताह आयोजित किए हैं। मानवता और विश्व शांति के लिए समर्पित ठाकुर जी का उद्देश्य है कि समाज में अहिंसा, प्रेम, सद्भावना और अध्यात्मिक चेतना का प्रसार हो।

संजीव कृष्ण ठाकुर जी के श्रीमुख से सुनाई गई कथा और भजनों ने रोहिणी के इस आयोजन को दिव्यता और ऊर्जा से भर दिया। श्रद्धालुओं ने गुरु महिमा के इस दिव्य संदेश का लाभ उठाया और भाव-विभोर होकर ठाकुर जी से आशीर्वाद प्राप्त किया।


रविवार, 13 जुलाई 2025

‘‘पढ़ेगा इंडिया तभी बढ़ेगा इंडिया’’ केवल नारा बनकर ही रह गया- कांग्रेस


दिल्ली प्रदेश कांग्रेस ने दिल्ली विश्वविद्यालय में यूनिवर्सिटी डेवलपमेंट फंड और सुविधा एवं सर्विस चार्ज के नाम पर छात्रों की फीस में इस वर्ष भी बढ़ोतरी कि आलोचना किया है।  दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेन्द्र यादव ने कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय में यूनिवर्सिटी डेवलपमेंट फंड और सुविधा एवं सर्विस चार्ज के नाम पर छात्रों की फीस में इस वर्ष भी बढ़ोतरी करके अतिरिक्त बोझा डाल दिया है। पिछले तीन वर्षों में यह वृद्धि लगभग दुगनी की गई है जबकि शिक्षक समुदाय भी इस पर आपत्ति जता रहा है। 

 डेवलपमेंट फंड, सुविधा और सर्विस चार्ज कालेज में पढ़ने वाले छात्रों से लेना अनैतिक है, इसको वहन करना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने पूछा कि यह फीस वृद्धि भाजपा के के.जी. से पी.जी. तक मुफ्त शिक्षा देने के वादे के खिलाफ है जबकि दिल्ली सरकार ने दिल्ली के प्राइवेट स्कूलों में फीस वृद्धि पर भी अभी तक कुछ नही किया है।

यह चिंताजनक है कि दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले छात्रों की फीस में 20 प्रतिशत की वृद्धि करके उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालकर उन्हें मानसिक रुप से प्रताड़ित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 में युनिवर्सिटी डेवलमेंट फंड और सुविधा व सर्विस चार्ज के 1500-1500 रुपये करके छात्रों से अतिरिक्त 3000 रुपये वसूले जाएंगे, इस बढ़ोतरी से दलित, वंचित, महिलाओं, कमजोर वर्ग, किसान, मजदूर, अल्पसंख्यक, ईडब्लूएस. पिछड़े वर्ग के छात्रों पर अधिक प्रभाव पड़ेगा। 

उन्होंने कहा कि भाजपा गरीब से शिक्षा को दूर करने की कोशिश कर रही है। शिक्षा का निजीकरण करके प्राईवेट संस्थानों में फीस पहले ही इतनी अधिक कर दी गई है कि उसमें कोई गरीब आदमी अपना बच्चा नही पढ़ा सकता और अब भाजपा सरकार दिल्ली विश्वविद्यालय में हर वर्ष फीस में बढ़ोतरी कर रही है।

देवेन्द्र यादव ने कहा कि भाजपा का नारा कि ‘‘पढ़ेगा इंडिया तभी बढ़ेगा इंडिया’’ केवल नारा बनकर ही रह गया है। जब भाजपा अगर सरकारी शिक्षण संस्थानों में फीस में अप्रत्याशित वृद्धि करेगी तो आम भारतीय के बच्चें कैसे पढ़ पाएंगे। उन्होंने कहा कि अगर गंभीरता से विचार किया जाए तो स्पष्ट दिखता है कि फीस वृद्धि से लड़कियों की शिक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा, क्योंकि अभी तक लोगों में यह मानसिकता है कि बेटी की जगह बेटे को पढ़ाऐं। 

फिर फीस वृद्धि के बाद कहीं न कहीं भाजपा ’बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का अपना नारा भी बेमानी साबित कर रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा की शिक्षा विरोधी नीति के कारण 12वीं के बाद उच्च शिक्षा प्राप्त करने की इच्छा रखने वाली आर्थिक रुप से कमजोर परिवारों की बेटियों का सपना पूरा नही हो सकता।

शनिवार, 12 अप्रैल 2025

नजरिया जीने का : अल्बर्ट आइंस्टाइन के इन पांच टिप्स से करें बच्चो की पेरेंटिंग


अल्बर्ट आइंस्टीन दुनिया के महान वैज्ञानिकों में से एक हैं जिन्होंने फिजिक्स में कई महत्वपूर्ण योगदान दिया है. अल्बर्ट आइंस्टाइन की विलक्षण सोच और उनकी प्रतिभा का दुनिया कायल है. आइए हम जानें कि पेरेंटिंग टिप्स अर्थात बच्चों के संबंध में संसार के इन महान वैज्ञानिकों का क्या कहना ह

आत्मविश्वास और स्वतंत्रता पर बल: 
बच्चों के संबंध में आइंस्टीन ने पेरेंट्स के लिए संदेश दिया है कि आप अपने बच्चों को सोचने और कुछ अलग करने के लिए उन्हें पर्याप्त आजादी दें. बेशक पेरेंटिंग मॉनिटरिंग करे, लेकिन उनके अपने बच्चों को आज़ादी देने किसी प्रकार की कंजूसी नहीं करनी चाहिए. उनका मानना था कि बच्चों को आजादी देने से हीं उनके अंदर आत्मविश्वास और स्वतंत्रता की भावना विकसित होती है।

जिज्ञासा बढ़ाएं: 
अल्बर्ट आइंस्टीन का यह साफ मानना था के बच्चों में जिज्ञासा का बढ़ना बहुत जरूरी . इसके लिए इसके लिए यह जरूरी है की परेंट्स  बच्चोंक साथ समय  बिताए. अल्बर्ट आइंस्टीन अल्बर्ट आइंस्टीन का यह मानना था की बच्चों में सीखने की इच्छा और जानने की उत्कंठा बहुत जरूरी है.  इससे बच्चों में सीखने की इच्छा और नए ज्ञान की खोज करने की क्षमता विकसित होती है।

रचनात्मकता को प्रोत्साहित करें: 
बच्चों के अंदर रचनात्मक का होना बहुत जरूरी होता है क्योंकि क्रिएटिव माइंड के बच्चे हैं ज्यादा सफल होते हैं. अल्बर्ट आइस्टीन ने बच्चों में रचनात्मकता को बढ़ाने के लिए जोर देते हुए कहा कि उनके अंदर उनके अंदर कल्पना शीलता का होना  बहुत जरूरी है. इससे बच्चों में कल्पनाशीलता और नवाचार की क्षमता विकसित होती है।

विफलता को स्वीकार करें:
 बच्चों के अंदर साहस और धर या की भवना विकसित करने के लिए यह जरूरी है कि आप उनकी प्रारंभिक विफलताओ को स्वीकार करना सीखें. प्रारंभिक विफलताओं को स्वीकार करे. लेकिन उनकी इच्छा शक्ति पर इसे हावी नहीं होने दें. जैसा कि आप जानते हैं साहस की तरह भाई भी संक्रामक होता है इसलिए यह जरूरी है कि आप बच्चों के अंदर से भाई को हटाकर उनके अंदर साहस और धैर्य की भावना को विकसित करने में अपना योगदान दें.

सुरक्षा की भावना पर बल:
 अल्बर्ट आइंस्टाइन ने बच्चों के साथ समय बिताने और उनके साथ मित्रवत रहने पर जोर दिया था उनका मानना था के पेरेंट्स को अपने बच्चों के साथ हमेशा प्रेम और समर्थन के साथ खड़ा रहना चाहिए. पेरेंट्स के प्रेम और समर्थन से बच्चों में आत्मविश्वास और सुरक्षा की भावना विकसित होती 

सोमवार, 31 मार्च 2025

नजरिया जीने का: नीली रोशनी में देखें राष्ट्रपति भवन का विहंगम दृश्य

 

विश्व बाल दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति भवन... प्रत्येक बच्चे के अधिकारों का जश्न मनाने के लिए, हर साल 19-20 नवंबर को विश्व स्तर पर और भारत में ऐतिहासिक स्थलों को नीली रोशनी में सजाय  जाता है। इस वर्ष के विश्व बाल दिवस का थीं है "भविष्य की बात सुनें" ।

रविवार, 30 मार्च 2025

नजरिया जीने का: मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम का जीवन है धर्म, सत्य और न्याय के प्रति समर्पण का प्रतीक


राम नवमी हिंदू धर्म का एक प्रमुख त्योहार है, जिसे भगवान राम के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। यह चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को पड़ता है। भगवान श्री राम श्रेष्ठ राजा थे. भगवान राम को विष्णु का सातवां अवतार माना जाता है। उनकी कथा मुख्य रूप से वाल्मीकि द्वारा लिखित "रामायण" और तुलसीदास द्वारा लिखित "रामचरितमानस" में वर्णित है।

हिन्दू पंचांग के अनुसार भगवान राम ने त्रेतायुग में रावण का संहार करने के लिए पृथ्वी पर अवतार लिए थे। भगवान राम ने अपने सम्पूर्ण जीवन मे मर्यादा, करुणा, दया, सत्य, सदाचार और धर्म के मार्ग पर चलते हुए राज किया और यही कारण है कि  उन्हें आदर्श पुरुष और मर्यादा पुरुषोत्तम भी कहा जाता है. 

राम का जीवन हमें मर्यादा, संयम और कर्तव्य का पाठ पढ़ाता है। उन्हें एक आदर्श पुत्र, पति, भाई और राजा के रूप में जाना जाता है। उनकी कहानी हमें विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य रखने और धर्म का पालन करने की शिक्षा देती है।

उनका जीवन धर्म, सत्य और न्याय के प्रति समर्पण का प्रतीक है। राम नवमी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह त्योहार लोगों को नैतिकता, धैर्य और परिवार के प्रति समर्पण की शिक्षा देता है।

राम का जन्म अयोध्या के राजा दशरथ और रानी कौशल्या के पुत्र के रूप में हुआ था। उनका जीवन धर्म, सत्य और न्याय के प्रति समर्पण का प्रतीक है। राम नवमी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह त्योहार लोगों को नैतिकता, धैर्य और परिवार के प्रति समर्पण की शिक्षा देता है।

सिर्फ टैलेंट या स्किल नहीं, खुद के अंदर का जुनून है जरूरी

भगवान राम ने गुरु वशिष्ठ से शिक्षा प्राप्त की  और यह भगवान राम को मिली  शिक्षाओं का हीं परिणाम था कि उन्होंने जीवन के आदर्शों की उन ऊंचाइयों को प्राप्त किया जिसके कारण उन्हे मर्यादा पुरुषोतम की उपाधि दी गई है। 

माता कैकेयी की बात की मर्यादा को निभाने के लिए भगवान राम को 14 वर्ष का वनवास जाना पड़ा लेकिन उन्होंने इसे सहर्ष निभाया। वनवास के दौरान रावण ने छल से सीता का हरण कर लिया। यह घटना रामायण के केंद्रीय कथानक का आधार बनी।

कठिन समय से विचलित होना कायरों का काम है

राम ने सुग्रीव, हनुमान और वानर सेना की मदद से लंका पर आक्रमण किया। रावण का वध करके उन्होंने सीता को मुक्त कराया और अधर्म पर धर्म की विजय स्थापित की।

राम का जीवन हमें मर्यादा, संयम और कर्तव्य का पाठ पढ़ाता है। उन्हें एक आदर्श पुत्र, पति, भाई और राजा के रूप में जाना जाता है। उनकी कहानी हमें विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य रखने और धर्म का पालन करने की शिक्षा देती है।

शनिवार, 22 मार्च 2025

नजरिया जीने का: ‘पर्पल फेस्ट' का हुआ राष्ट्रपति भवन मे आयोजन- जानें खास बातें


दिव्यांगजनों की प्रतिभा, उपलब्धियों और आकांक्षाओं का उत्सव मनाने के लिए (21 मार्च, 2025 को  अमृत उद्यान में एक दिवसीय ‘पर्पल फेस्ट’ का आयोजन किया गया।

राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने महोत्सव का दौरा किया और दिव्यांगजनों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक प्रस्तुतियों को देखा। अपने संक्षिप्त वक्तव्य में उन्होंने कहा कि वंचित वर्ग के प्रति संवेदनशीलता ही किसी देश या समाज की प्रतिष्ठा निर्धारित करती है। करुणा, समावेशिता और सद्भावना हमारी संस्कृति और सभ्यता के मूल्य रहे हैं। हमारे संविधान की प्रस्तावना में सामाजिक न्याय, समानता और व्यक्ति की गरिमा की बात कही गई है।

आगंतुकों के लिए दिन भर विभिन्न गतिविधियां जैसे खेल, डिजिटल समावेशन और उद्यमिता पर कार्यशालाएं, एबिलिम्पिक्स, रचनात्मक कार्यक्रम और सांस्कृतिक उत्सव का आयोजन किया गया।

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा आयोजित ‘पर्पल फेस्ट’ का उद्देश्य विभिन्न दिव्यांगता और लोगों के जीवन पर उनके प्रभाव के बारे में जागरूकता बढ़ाना तथा समाज में दिव्यांगजनों की समझ, स्वीकृति और समावेश को बढ़ावा देना है।

मंगलवार, 18 मार्च 2025

भारतेन्दु नाट्य उत्सव 2025: ‘रानी नागफनी की कहानी’ और ‘कन्यादान’ का हुआ मंचन


भारतेन्दु नाट्य उत्सव 2025 के दूसरे दिन दोपहर के सत्र में सुप्रसिद्ध नाटककार विजय तेंडुलकर द्वारा रचित सामाजिक नाटक ‘कन्यादान’ और शाम के सत्र में हरिशंकर परसाई की व्यंग्यात्मक कृति ‘रानी नागफनी की कहानी’ का मंचन हुआ का प्रभावी मंचन किया गया। अमूल सागर के निर्देशन में ब्लैक पर्ल आर्ट्स समूह द्वारा प्रस्तुत  नाटक ‘कन्यादान’  ने जातिवाद, आदर्शवाद और सामाजिक बदलाव की जटिलताओं को उजागर किया। कहानी एक प्रगतिशील राजनेता नाथ देवलीकर के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपनी बेटी ज्योति की शादी अरुण अथवले नामक दलित कवि से कराकर सामाजिक परिवर्तन की दिशा में एक कदम बढ़ाने का सपना देखते हैं। लेकिन यह आदर्शवादी सोच कठोर वास्तविकता से टकराती है जब ज्योति वैवाहिक जीवन की चुनौतियों का सामना करती है। इस प्रस्तुति ने दर्शकों को गहरे सामाजिक ताने-बाने पर सोचने के लिए मजबूर कर दिया।



ऐतिहासिक नाटक ‘छत्रपति शिवाजी महाराज’ के शानदार मंचन के साथ भव्य शुरुआत के बाद, साहित्य कला परिषद एवं दिल्ली सरकार द्वारा आयोजित भारतेन्दु नाट्य उत्सव 2025 के दूसरे दिन भी रंगमंच की अनूठी छटा बिखरी। इस दिन दो सशक्त नाटकों का मंचन किया गया, जिन्होंने दर्शकों को गहरे सामाजिक संदेश दिए।


शाम के सत्र में हरिशंकर परसाई की व्यंग्यात्मक कृति ‘रानी नागफनी की कहानी’ का मंचन हुआ, जिसे सुरेंद्र शर्मा के निर्देशन में रंग सप्तक समूह ने प्रस्तुत किया। यह नाटक समकालीन सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों पर तीखा व्यंग्य प्रस्तुत करता है। नाटक की पात्र संरचना और कथा प्रवाह ने आधुनिक समाज की विसंगतियों को बड़े ही रोचक और हास्यपूर्ण अंदाज में प्रस्तुत किया। दर्शकों ने इस व्यंग्य नाटक का खूब आनंद उठाया और इसकी गूढ़ सामाजिक व्याख्या को सराहा।


उत्सव के तीसरे दिन दो और बेहतरीन नाटकों का मंचन किया जाएगा। दोपहर 3:30 बजे ‘दार्जिलिंग वेनम’ का मंचन होगा, जिसे दिव्यांशु कुमार और क्षितिज थिएटर ग्रुप द्वारा प्रस्तुत किया जाएगा। यह नाटक दर्शकों को एक गहन और रोमांचक अनुभव देने का वादा करता है। वहीं, शाम 7:00 बजे बासब भट्टाचार्य के निर्देशन में हास्य नाटक ‘सइयां भए कोतवाल’ का मंचन किया जाएगा, जो उत्सव का शानदार समापन करेगा।


भारतेन्दु नाट्य उत्सव 2025 भारतीय रंगमंच की विविधता और उत्कृष्टता का प्रतीक बनकर उभर रहा है, जहां सामाजिक, व्यंग्यात्मक और हास्य नाटकों का संगम दर्शकों को अपनी समृद्ध परंपरा से जोड़ रहा है।

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कठिन समय से कायर भागते हैं, सामना करने की कला सीखें 

शनिवार, 15 मार्च 2025

नजरिया जीने का: धैर्य @ ये पाँच उक्तियाँ आपके जीवन को बदल देंगी


धैर्य और मौन हमारे व्यक्तित्व के दो महत्वपूर्ण गुण हैं। मौन में अपने आप में विशेष शक्ति होती है और यह आपको एक भी शब्द बोले बिना खुद को बेहतर तरीके से व्यक्त करने में मदद करता है। यह एकमात्र मौन है जो सबसे जटिल लोगों और परिस्थितियों से निपटने में मदद करता है, और हमारे जीवन में कोई भी इन तथ्यों को अनदेखा नहीं कर सकता है। यह धैर्य और मौन ही है जो कठिन लोगों से निपटने के दौरान बेकार या बेकार शब्दों का उपयोग करने से बचने में आपकी मदद कर सकता है।



इस तथ्य के बावजूद कि हम पहले से ही दोनों शब्दों से परिचित हैं, फिर भी खुद से पूछने की ज़रूरत है कि क्या हम वास्तव में इन शब्दों से शाब्दिक रूप से परिचित हैं?



धैर्य और मौन दोनों ही जीवन में हमारे लक्ष्यों को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और वास्तव में, यह आपके आस-पास होने वाली दैनिक गतिविधियों में आपका मार्गदर्शन करते हैं।



वास्तव में, "धैर्य और मौन दो शक्तिशाली ऊर्जा हैं। धैर्य आपको मानसिक रूप से मजबूत बनाता है और मौन आपको भावनात्मक रूप से मजबूत बनाता है।"

जब भी आप भ्रम की स्थिति में हों और मानसिक रूप से परेशान हों, तो आपको मौन और धैर्य की अपनी वास्तविक गुणवत्ता को प्रदर्शित करना होगा। निश्चित रूप से जब सब कुछ आपकी इच्छा और उम्मीद के विरुद्ध हो रहा हो तो शांत और मौन रहना आसान काम नहीं होगा।



लेकिन, शांत रहना और मिस्टर कूल की तरह व्यवहार करना आपको प्रसिद्ध क्रिकेटर एम एस धोनी जैसा बना देगा जो मैच के दौरान तनावपूर्ण और कठिन परिस्थितियों में अपने धैर्य और मौन के लिए जाने जाते हैं। धोनी ने मैदान पर क्रिकेट मैच के दौरान कई बार अपने मिस्टर कूल गुणों को साबित किया है।



दुनिया के सबसे प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा अक्सर कहा करते थे कि मौन कई सवालों का सबसे अच्छा जवाब होता है और आप यकीन नहीं कर सकते कि दुनिया के प्रमुख शीर्ष नेता भी इसी का पालन करते हैं, खासकर कई विवादास्पद और महत्वपूर्ण मुद्दों पर मीडिया और अन्य लोगों से बातचीत करते समय।

रविवार, 9 मार्च 2025

नजरिया जीने का: असफल होने का डर सफलता की राह में सबसे बड़ी बाधा है, जानें कैसे

यह एक सर्वमान्य सच है कि हम असफलता से अधिक उसके डर या कहें कि उसके खौफ से अधिक भयभीत होते हैं। असफलता तो सिर्फ एक कड़वा अनुभव का नाम है जो कि हमें कुछ सफलता के लिए टिप्स और एक बार अपने को मूल्यांकन करने का मौका देकर जाता है। लेकिन सबसे अधिक दुर्भाग्यशाली यह है कि हम असफलता से नहीं बल्कि उसके खौफ कि जद में आकर हम सफलता कि सांभावनाओं का गला घोंट देते हैं। 

ओपरा विनफ्रे न क्या खूब कहा है-"असफलता तब नहीं होती जब आप गिरते हैं, असफलता तब होती है जब आप गिरने के बाद उठने से इनकार करते हैं।"

किसी शायर ने क्या खूब कहा है-

"हादसों कि जद में हैं, तो मुस्कराना छोड़ दें,
जलजलों के खौफ से क्या घर बनाना छोड़ दें। "

याद रखें, असफलता से अधिक उसके डर का खौफ है जो असफलता से अधिक हानिकारक होता है। इतिहास उठाकर देख लीजिए, लोगों ने कितने अवसरों को सिर्फ इसलिए खो दिया है क्योंकि हम असफलता के भय के खौफ से बाहर नहीं निकाल सके। 



स्वामी विवेकानंद ने असफलता के भी के संदर्भ मे कहा था-उठो, जागो और तब तक रुको मत जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए। असफलता का भय सबसे बड़ी असफलता है।
ओपरा विनफ्रे न क्या खूब कहा है-"असफलता तब नहीं होती जब आप गिरते हैं, असफलता तब होती है जब आप गिरने के बाद उठने से इनकार करते हैं।"
आप खुद का मूल्यांकन  करके देखें तो पाएंगे कि जब भी हम असफलता के डर में जीते हैं, तो हम कोई नया कदम उठाने से हिचकिचाते हैं क्योंकि असफलता कि खौफ से हम बाहर नहीं निकाल पाते जो सिर्फ और सिर्फ हमारे निराधार कल्पना पर आधारित होता है। 
अब्राहम लिंकन ने असफलता के भय पर प्रहार करते हुए कहा था कि "असफल होने का डर सफलता की राह में सबसे बड़ी बाधा है।"
असफलता के भी से उपजे इस काल्पनिक डर का प्रभाव हमारे मनोबल पर इस कदर अपना प्रभाव छोड़ता है कि हम अपनी क्षमताओं पर संदेह करने लगते हैं जो कि हमारे हार और असफलता का सबसे प्रमुख कारण होता है। सिर्फ टैलेंट या स्किल नहीं, खुद के अंदर का जुनून है जरूरी
नेपोलियन हिल के इस कथन को हमेशा याद रखे-"विजेता कभी नहीं हारते और हारने वाले कभी नहीं जीतते। विजेता असफलता से डरते नहीं, वे उससे सीखते हैं।"

शनिवार, 1 मार्च 2025

International Women Day Quotes: इन संदेशों से दीजिए अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की हार्दिक बधाई

najariya jine ka International Women Day Quotes

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस (International Women’s Day) हर साल 8 मार्च को मनाया जाता है। महिलाओं को सम्मान देने और उनके योगदान को समर्पित यह दिन दुनिया में हर जगह मनाया जाता है। खास  तौर पर अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस का यह दिन महिलाओं की सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक उपलब्धियों को सम्मान देने और लैंगिक समानता को बढ़ावा देने के लिए समर्पित है।

इस दिन का मुख्य उद्देश्य महिलाओं के अधिकारों के प्रति जागरूकता फैलाना और समाज में उनके योगदान को मान्यता देना है।

1.

नारी शक्ति का सम्मान दीजिए,
घर से लेकर, बाहर तक,
धरती से लेकर आकाश तक,
अंतरिक्ष तक उसके पहुँच को
स्वीकार कीजिए,
नारी शक्ति को सम्मान दीजिए।
महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।

 2.

सूर्योदय वहीं, जहां नारी का मान होगा,
सभ्यता वहीं, जहां नारी का सम्मान होगा,
डूब गया वह कोना, सदा के लिए,
जहां कहीं नारी का अपमान होगा।
महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।

3.

सिर्फ घर की लक्ष्मी नहीं,
धरती की देवी है नारी,
घर तो क्या,
दुनिया संवार सकती है नारी,
सिर्फ प्रेम की हीं नहीं,
वात्सल्य और ममता की देवी है नारी।
महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।

4.

शक्ति की सागर है, हर नारी,
माँ हो या बहन या चाहे बेटी,
प्रेम और स्नेह की गागर है हर नारी,
खुद के नजरिए को बदल के देखो,
दोस्ती से पड़े, प्रेम की देवी है हर नारी।
महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।

नजरिया जीने का-सिर्फ हार्ड वर्क नहीं स्मार्ट वर्क भी है जरूरी: जाने दोनों के मदद से कैसे पाएं सफलता

एक समय था जब हार्ड वर्क अर्थात कठिन परिश्रम को हीं सफलता की गारंटी मानी जाती थी। कठिन परिश्रम के बिना सफलता या अपने लक्ष्य की प्राप्ति मुश्किल होती है और इसमे किसकी को कोई संदेह नहीं होनी चाहिए। लेकिन आज के दौर में जहां नवीनतम और
लैटस्ट टेक्नॉलोजी या चुके हैं और लगभग जीवन के हर क्षेत्र मे कड़ी प्रतिस्पर्धा या गला काट प्रतियोगिता कि होड मची है, क्या सिर्फ कठिन परिश्रम से हीं सफलता प्राप्त करने की सोचना समय से पीछे चलना नहीं होगा?

 याद रखें दोस्तों, आज का ये दौर स्मार्ट वर्क का भी है क्योंकि सिर्फ हार्ड वर्क करके आप परिश्रम तो करते हैं, लेकिन स्मार्ट वर्क के साथ अगर हार्ड वर्क की जाए तो सफलता प्राप्त करने कि संभावना भी बढ़ जाएगी और समय भी कम लगेगा क्योंकि आप चीजों को स्मार्टली कर रहे होते हैं।

जानें  हार्ड वर्क और स्मार्ट वर्क मे अंतर 

हार्ड वर्क से हमारा मतलब होता है किसी काम को पूरा करने के ईमानदारी से प्रयास करना और घंटों मेहनत करना जहां परिणाम प्राप्त नहीं होने कि कोई संभावना नहीं रहे, खासतौर पर अपनी ओर से। वही दूसरी ओर  स्मार्ट वर्क का मतलब है कम समय में समान काम को पूरा करने के लिए रणनीति बनाना, सावधानीपूर्वक योजना बनाना, लेकिन स्मार्टली तरीके से। 

सच तो है है कि स्मार्ट वर्क और हार्ड वर्क दोनों के अपने फायदे और नुकसान हैं और दोनों हीं जीवन मे सफलता प्राप्त करने के लिए जरुती है। हैँ, इसके लिए आप निर्धारित किए गए लक्ष्य और जीवन के उदेशयों कि विशालता और पर्फेक्शन को देखते हुए यह आपके परिस्थितियों और व्यक्तिगत प्राथमिकताओं पर निर्भर करता है।

हार्ड वर्क क्यों है जरूरी?

एक तरत जहां हार्ड वर्क करने कि आपकी जुनून आपके अंदर अनुशासन और दृढ़ता को विकसित करता है जो कि निश्चय ही सफलता की सबसे पहली शर्त है। इसके साथ हीं आप हार्ड वर्क के जरिए अपने क्षेत्र मे महारत हासिल करने के योग्य हो जाते हैं। कठिन परिक्षम के साथ हीं आपके अंदर आत्मविश्वास और संतुष्टि की भावना पैदा होती है। इसके अतिरिक्त हार्ड वर्क करने से आपकी एकाग्रता और लगन का भाव पैदा होता है  जो आपके लक्ष्य के प्रति आपकी प्रतिबद्धता को भी दिखाता है। 

स्मार्ट वर्क है आज की जरूरत 

वहीं दूसरी ओर, स्मार्ट वर्क के अपने फाइडे हैं जो कि जाहिर है हार्ड वर्क से अलग चीजों को काफी पर्फेक्शन और स्मार्टली तरीके से किया जाता है। स्मार्ट वर्क के अंतर्गत आप समय और ऊर्जा की बचत करते हैं जहां आप चीजों को करने के लिए ऑल्टर्नटिव और लैटस्ट उपायों को प्रयोग मे लाते हैं। इनके प्रयोग से एक तरफ तो आप समय और ऊर्जा बचाते हैं वहीं दूसरी ओर आप काफी साइंटिफिक वे मे परिणामों को प्राप्त कर  उनकी व्याख्या करते हैं। स्मार्ट वर्क एक तरफ जहां नवीन समाधान खोजने को प्रोत्साहित करता है वहीं बेहतर परिणामों के लिए प्राथमिकता और रणनीति पर ध्यान केंद्रित करता है.

स्मार्ट वर्क और हार्ड वर्क मे बैठायें सामंजस्य 

अगर आप जीवन मे सफलता चाहते हैं तो बुद्धिमानी के साथ स्मार्ट और हार्ड वर्क मे सामंजस्य बैठायें और सबसे अच्छा दृष्टिकोण या आदर्श  स्थिति यह होगी कि आप स्मार्ट वर्क और हार्ड वर्क को एक साथ मिलाकर काम करें। 

उसके लिए सबसे अच्छा होगा कि स्मार्ट वर्क के हेल्प से आप योजना बनाएँ और इसके लिए सबसे पहले आप अपने लक्ष्यों को स्पष्ट करें। लक्ष्य के साथ सबसे पहले अपनी प्राथमिकताएँ निर्धारित करें और उपलब्ध संसाधनों और जरूरत के मुताबिक सबसे प्रभावी रणनीतियों की पहचान करें। 

रणनीति तैयार करें 

ध्यान रखें, एक बार जब आप स्मार्ट रणनीति तैयार कर लें, तो उसे लागू करने के लिए मेहनत और समर्पण की आवश्यकता होती है। एक बार लक्ष्य और प्राथमिकता निश्चित हो जाने के बाद आप निर्धारित लक्ष्य को हासिल करने के लिए हार्ड वर्क करने आरंभ करें। अपने स्ट्रैटिजी और स्टेप्स का हमेशा हार्ड वर्क से क्रियान्वित करें और स्मार्टली उनका मूल्यांकन करें। 

कठिन परिश्रम करें 

स्ट्रैटिजी के अनुसार स्मार्टली अपने परिणामों का विश्लेषण करें और अपने दृष्टिकोण को समायोजित करें ताकि समय सीमा के अंदर कार्य सम्पन्न हो सके। याद रखें जीवन मे सफलता के लिए दोनों आवश्यक है क्योंकि एक तरफ जहां  स्मार्ट वर्क आपको सही दिशा में निर्देशित करता है, वहीं दूसरी ओर हार्ड वर्क आपको वहां पहुंचाता है जहां लक्ष्य और परिणाम आपका इंतजार कर रहा होता है।