मंगलवार, 4 नवंबर 2025

नजरिया जीने का: कठिन समय में जो डटा रहता है, वही इतिहास बनाता है

 najariya jine ka Hard times in life how to face


नजरिया जीने का: कठिन समय जीवन का अभिन्न अंग है और यह जीवन के लिए धुप-छाव के खेल की तरह है. किसी विद्वान ने क्या खूब कहा है कि "परिस्थितियां हमेशा तुम्हारे अनुकूल रहे ऐसे आशा नहीं करों क्योंकि यह संसार सिर्फ तुम्हारे लिए नहीं बनी है." हर व्यक्ति को अपने जीवन में कभी न कभी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है लेकिन यहाँ यह समझना महत्वपूर्ण है कि कठिन समय हमेशा के लिए नहीं रहते हैं। धैर्य रखने से हमें मुश्किलों का सामना करने में मदद मिलती है।

जीवन में अगर आपके सामने कोई लक्ष्य है और कोई उद्देश्य है तो आपको उसे प्राप्त करने के लिए किसी न किसी कठिन दौर से गुजरना पड़ता है। आप भले हीं इस कठिन समय को नेगेटिव तौर पर लें, लेकिन सच्चाई यही है कि ये समय ही हमें हमारी असली क्षमता का एहसास कराते हैं।

जीवन में हार्ड टाइम या कठिन समय का आना जिंदगी का अभिन्न अंग है  और इससे घबराने के बजाये इसका सामना करें. हमारे जीवन में कुछ भी स्थायी नहीं है. जीवन के किसी खास फेज में आने वाले कठिन समय या हार्ड टीम और कुछ नहीं बल्कि परिस्थितियों का  संयोग ,मात्र होता है. निश्चित रूप से तथाकथित कठिन समय या हम कहें की विपरीत परिस्थितियां जीवन का एक खास समय होता जो हमारे सोच के अपेक्षित नहीं होती है और जो जल्द ही बीत जाते हैं।

अब यह निर्भर हम पर करता है कि इन कठिन समय का सामना करने को हैं तैयार  हैं या अपने पीठ दिखा कर भाग जाते हैं. लेकिन इतना तो तय है कि जो व्यक्ति कठिनाइयों से डरकर भाग जाता है, और समस्याओं से मुंह मोड़ लेता है, वही कायर कहलाता है और उसके लिए यह जीवन बोझ की तरह है क्योंकि जीवन एक रण क्षेत्र है वह एक हरा और कायर सैनिक बनकर जीने का रास्ता चुनता है. 

वहीं दूसरी और जो वीर होते हैं वे  कठिनाइयों को अवसर की तरह देखते हैं और  वे संघर्ष करके सफलता की राह तैयार करते हैं जिन्हे संसार एक सफल और योद्धा की तरह याद करता है. 

याद रखें, एक तीर को कमान से छोड़ने से पहले उसे पीछे की ओर खींचना जरुरी होता है, अतः हमारे जीवन का कठिन समय इस बात का संकेत है कि हमने एक कदम तो पीछे ले लिया है लेकिन इसका मतलब यह भी है कि हम  जीवन में एक लंबी छलांग लगाने के लिए तैयार हैं .

कठिन समय में विचलित होने के जगह हम इन टिप्स की मदद से खुद को मजबूत और सकारात्मक बनाये रख सकते हैं 

धैर्य रखें :

यह समझना महत्वपूर्ण है कि कठिन समय हमेशा के लिए नहीं रहते हैं। धैर्य रखने से हमें मुश्किलों का सामना करने में मदद मिलती है। जो कठिनाइयों से डरता है, वह न तो कभी जीवन की ऊँचाइयों को  छू सकता है और न हीं वह दुनिया के लिए कोई अनुकरणीय पदचिन्ह छोड़ पाता है. जीवन की सच्चाई भी यही है कि कठिन समय में जो डटा रहता है, वही इतिहास बनाता है।

तू छोड़ ये आंसू उठ हो खड़ा, 

मंजिल की ओर अब कदम बढ़ा,

हासिल कर इक मुकाम नया, 

पन्ना इतिहास में जोड़ दे,

घुट-घुट कर जीना छोड़ दे,

-नरेंद्र वर्मा

सकारात्मक रहें : 

नकारात्मक विचारों में डूबने के बजाय, हमें सकारात्मक सोच रखनी चाहिए। हमें यह खुद को समझाना होगा कि जीवन में जिसे हम ख़राब समय या बुरा समय कहते हैं, वह हर संघर्ष हमें और मजबूत बनाने आया है, न कि हमें तोड़ने और हमारी मजबूत इरादे को डिगाने आया है. 

 कमजोरियों का सामना करें :

 कठिन समय हमें अपनी कमजोरियों का पता लगाने और उन्हें दूर करने का मौका देता है। कठिन समय हमें अपनी गलतियों से सीखने और भविष्य में उन्हें दोहराने से बचने का मौका देता है।

मदद लेने में नहीं हिचकें : 

कठिन समय में हमें दूसरों की मदद लेने में संकोच नहीं करना चाहिए। सकारात्मक और आशावादी रवैया अपनाकर, इन परिस्थितियों से बिना घबराए इनका सामना करने का साहस दिखाना ही बहादुरी है.ये कठिन समय आपके जीवन की दौड़ के रास्ते में कोई बाधा नहीं है... वास्तव में प्रकृति आपके धैर्य की परीक्षा लेने की प्रक्रिया में है जिसके परिणामस्वरूप आप मजबूत बनेंगे.


बाधाएँ आती हैं आएँ

घिरें प्रलय की घोर घटाएँ,

पावों के नीचे अंगारे,

सिर पर बरसें यदि ज्वालाएँ,

निज हाथों में हँसते-हँसते,

आग लगाकर जलना होगा।

क़दम मिलाकर चलना होगा।

-अटल बिहारी वाजपेयी

आप इतिहास उठा कर देख लीजिये, यह कठिनाइयाँ हीं है जो हमारी धैर्य और परिश्रम को दुनिया को बताती है कि बिना संघर्ष के कोई भी व्यक्ति महान नहीं बन सकता साथ हीं यह हमारी  ताकत, धैर्य और आत्मविश्वास को उजागर करता है।




नजरिया जीने का: जानें श्रीराम गोपालन और "प्रकृत् अरिवगम्" लाइब्रेरी के बारे में


प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के मन की बात कार्यक्रम आज किसी परिचय  की मोहताज नहीं है. आज जबकि टेलीविजन और इंटरनेट  का दौर है, इस युग में भी प्रधान मंत्री के इस लोकप्रिय कार्यक्रम ने मोटिवेशन और दूसरों  प्रोत्साहित करने के लिए लोगों में  खास उत्साह पैदा किया है. निश्चित ही प्रधानमंत्री के इस कार्यक्रम में वर्णित कई  ऐसे योद्धा हैं को खुद में खुद  इंस्पायरिंग और मोटिवेशनल हैं. 


मन की बात में प्रधानमंत्री ने ऐसे हीं एक मोटिवेशनल घटना का वर्णन किया था जो खासतौर पर इंस्पायरिंग और उत्साहवर्धक है. प्रधानमंत्री ने बताया था "प्रकृत् अरिवगम्" लाइब्रेरी  के बारे में जो आपको  भी इंस्पायर करेगी. 

प्रधानमंत्री ने  बच्चों की पढ़ाई को लेकर कहा था कि आज कई तरह के प्रयोग हो रहे हैं। कोशिश यही है कि हमारे बच्चों में creativity और बढ़े, किताबों के लिए उनमें प्रेम और बढ़े – कहते भी हैं ‘किताबें’ इंसान की सबसे अच्छी दोस्त होती हैं, और अब इस दोस्ती को मजबूत करने के लिए, Library से ज्यादा अच्छी जगह और क्या होगी। 

श्रीराम गोपालन जी की कहानी

इस सन्दर्भ में प्रधानमंत्री ने चेन्नई का एक उदाहरण  share करते हुए बताया कि वहां बच्चों के लिए एक ऐसी library तैयार की गई है, जो, creativity और learning का Hub बन चुकी है। इसे प्रकृत् अरिवगम् के नाम से जाना जाता है। इस library का ।dea, technology की दुनिया से जुड़े श्रीराम गोपालन जी की देन है। 

विदेश में अपने काम के दौरान उन्होंने  latest technology की दुनिया से जुड़े रहने के बावजूद वो, बच्चों में पढ़ने और सीखने की आदत विकसित करने के बारे में भी सोचते रहे। भारत लौटकर उन्होंने प्रकृत् अरिवगम् को तैयार किया।

तीन हजार से अधिक किताबें

इसमें तीन हजार से अधिक किताबें हैं, जिन्हें पढ़ने के लिए बच्चों में होड़ लगी रहती है। किताबों के अलावा इस library में होने वाली कई तरह की activities भी बच्चों को लुभाती हैं। Story Telling session हो, Art Workshops हो, Memory Training Classes, Robotics Lesson या फिर Public Speaking, यहां, हर किसी के लिए कुछ-न-कुछ जरूर है, जो उन्हें पसंद आता है।

जाहिर है कि श्रीराम गोपालन जी की कहानी काफी इंस्पायरिंग और मोटिवेशनल है और नजरिया जीने द्वारा प्रस्तुत  इस स्टोरी के माध्यम से आप भी निश्चित हीं मोटिवेटेड होंगे. 

(श्रोत-प्रधानमंत्री द्वारा प्रस्तुत मन की बात कार्यक्रम से )


रविवार, 2 नवंबर 2025

नजरिया जीने का: आपके शांत मस्तिष्क का रिफ्लेक्शन है आपका धैर्य, पहचानें इसकी कीमत



नजरिया जीने का:
 शांत मस्तिष्क और धैर्य के बीच गहरा संबंध है और सच्चाई तो यह है कि धैर्य एक महत्वपूर्ण गुण है जो हमें जीवन में सफलता और खुशी प्राप्त करने में मदद करता है। धैर्यवान व्यक्ति शांत रहता है और मुश्किल परिस्थितियों में भी अपना आपा नहीं खोता है। इससे आप शायद हीं इंकार करेंगे कि जब हमारा मस्तिष्क शांत होता है, तो हम बेहतर तरीके से सोच सकते हैं और निर्णय ले सकते हैं। इसके साथ ही शांत रहने का सबसे अहम् लाभ यह है कि हम अपनी भावनाओं को नियंत्रित कर सकते हैं, तो हम मुश्किल परिस्थितियों में भी शांत रह सकते हैं।

जीवन में सफलता प्राप्त करना चाहते हैं तो धैर्य की कीमत को स्वीकारना हीं होगा। जब तक आपका मस्तिष्क शांत और मन गंभीर नहीं होगा आप धैर्य को अपना ही नही सकते।
और अशांत मन में धैर्य और शांति की कल्पना ही निरर्थक है क्योंकि आखिर शांति ही प्रगति और उन्नति का एकमात्र रास्ता हैं।
यह हमारा शांत मस्तिष्क और गंभीर मन हीं जो जीवन में आने वाली कठिन से कठिन  समस्याओं को भी सामना करने का मार्ग प्रशस्त करती है।
समस्याओं का आना तय है क्योंकि आखिर जीवन है तो बाधा है और सफलता के मार्ग में फूलों की उम्मीद बेमानी ही तो है। यह धैर्य हीं है जो आपके जीवन में आने वाले विपरीत परिस्थितियों से गंभीरता के साथ निबटना सिखाती है।

मस्तिष्क शांत रखने के लाभ 

अपनी भावनाओं को नियंत्रित कर सकते हैं: जब हम अपनी भावनाओं को नियंत्रित कर सकते हैं, तो हम मुश्किल परिस्थितियों में भी शांत रह सकते हैं।
स्पष्ट रूप से सोच सकते हैं: जब हम स्पष्ट रूप से सोच सकते हैं, तो हम बेहतर निर्णय ले सकते हैं और मुश्किलों का सामना करने के बेहतर तरीके खोज सकते हैं।
सकारात्मक रह सकते हैं: जब हम सकारात्मक रहते हैं, तो हम मुश्किलों को चुनौतियों के रूप में देख सकते हैं और उनसे पार पा सकते हैं।
धैर्यवान बनने के लिए:

अपने मस्तिष्क को शांत करना सीखें:
ध्यान: ध्यान करने से मस्तिष्क शांत होता है और एकाग्रता बढ़ती है।
योग: योग करने से शरीर और मन दोनों शांत होते हैं।
गहरी सांस लेना: गहरी सांस लेने से तनाव कम होता है और मस्तिष्क शांत होता है।

सकारात्मक सोच रखें:
अपने लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करें: जब आप अपने लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करते हैं, तो आपको मुश्किलों का सामना करने की प्रेरणा मिलती है।
खुद पर विश्वास रखें: हमें खुद पर विश्वास रखना चाहिए और यह जानना चाहिए कि हम किसी भी मुश्किल का सामना कर सकते हैं।
सकारात्मक लोगों के साथ रहें: सकारात्मक लोगों के साथ रहने से आपको सकारात्मक सोच रखने में मदद मिलती है।





मंगलवार, 28 अक्टूबर 2025

नजरिया जीने का: सेल्फ डिसप्लिन से बढ़ाएं अपना कान्फिडन्स, जानें कैसे?

 


नजरिया जीने का: नकारात्मक विचारों को खुद से दूर रखने के लिए आपको अपने भीतर के प्रेरक और प्रेरक विचारों का पालन करना होगा। अनुशासित जीवनशैली और गलत विचारों और कार्यों से दूर रहने का इरादा आपके आत्मविश्वास को बेहतर बनाने का पैरामीटर है। यहाँ कुछ सुझाव दिए गए हैं जो आपको बेहतर समय प्रबंधन और आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए अनुशासित जीवनशैली का पालन करने के लिए दिशा-निर्देश प्रदान करेंगे।

1. स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करें

अनुशासित जीवनशैली की नींव के लिए स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करना सबसे ज़रूरी है। याद रखें कि आपको अपने लक्ष्यों को अल्पकालिक और दीर्घकालिक में वर्गीकृत करना होगा। अल्पकालिक लक्ष्यों के तहत, आपको दैनिक और साप्ताहिक लक्ष्यों से शुरुआत करनी चाहिए जो प्राप्त करने योग्य हों। वह दृष्टि और सपना जिसे आप अगले कुछ महीनों या वर्षों में हासिल करना चाहते हैं, उसे दीर्घकालिक लक्ष्य कहा जा सकता है।

2. दैनिक दिनचर्या बनाएँ

अपनी दैनिक दिनचर्या को न्यायपूर्ण और पारदर्शी तरीके से विभाजित करें ताकि आप अपने तरीके से उसका पालन कर सकें। आप अपनी दैनिक दिनचर्या को इस तरह से विभाजित कर सकते हैं-

सुबह की दिनचर्या: अपने दिन की शुरुआत ऐसी गतिविधियों से करें जो आपको ऊर्जा देती हैं। इसमें व्यायाम, ध्यान, स्वस्थ नाश्ता और अपने दिन की योजना बनाना शामिल हो सकता है।

कार्य/अध्ययन अनुसूची: काम, अध्ययन और ब्रेक के लिए विशिष्ट समय ब्लॉक आवंटित करें। अपने कार्यों को व्यवस्थित करने के लिए प्लानर, कैलेंडर या ऐप जैसे टूल का उपयोग करें।

शाम की दिनचर्या: ऐसी गतिविधियों के साथ आराम करें जो आपको आराम दें, जैसे पढ़ना, हल्का व्यायाम या दिन के बारे में सोचना।

3. कार्यों को प्राथमिकता दें

हमेशा अपने कार्यों को समय पर और समय सीमा में पूरा करने की आवश्यकता और महत्व के आधार पर प्राथमिकता दें। अपने कार्यों को जरूरी/महत्वपूर्ण, जरूरी नहीं/महत्वपूर्ण, जरूरी/महत्वपूर्ण नहीं और जरूरी नहीं/महत्वपूर्ण नहीं में वर्गीकृत करें। हमेशा एक  नोट तैयार करें और "टू-डू लिस्ट" के रूप में चिह्नित करें जो आपकी सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

4. शारीरिक स्वास्थ्य बनाए रखें

नियमित रूप से व्यायाम करें: अपनी दिनचर्या में शारीरिक गतिविधि को शामिल करें, प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट का लक्ष्य रखें।

संतुलित भोजन करें: सुनिश्चित करें कि आपके आहार में आपकी ऊर्जा के स्तर को बनाए रखने के लिए विभिन्न पोषक तत्व शामिल हों।

अच्छी नींद लें: समग्र स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए हर रात 7-9 घंटे की अच्छी नींद लेने का लक्ष्य रखें।

5. मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान दें

मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान दें और अपने आत्मविश्वास के स्तर को प्रोत्साहित करने और अपने दिमाग में नकारात्मक विचारों से बचने की रणनीति पर भी ध्यान दें। नकारात्मक व्यक्तियों और ऐसे लोगों से बचें जिनकी टिप्पणियाँ और सुझाव हमारे दिमाग में नकारात्मक विचारों के निर्माण के लिए परेशानी पैदा कर रहे हैं। आप नीचे दिए गए कुछ सुझावों का पालन करके अपने मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।

ध्यान और माइंडफुलनेस: तनाव को कम करने और फोकस बढ़ाने के लिए रोजाना ध्यान या माइंडफुलनेस का अभ्यास करें। सकारात्मक मानसिकता बनाने और आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए पुष्टि का उपयोग करें।  यदि आप अभिभूत महसूस कर रहे हैं, तो मित्रों, परिवार या पेशेवरों से संपर्क करने में संकोच न करें।

6. लगातार  सीखने की आवश्यकता 

चुनौतियों से निपटने और प्रतिकूल परिस्थिति का विश्लेषण करने की आपकी सारी शक्ति और क्षमता आपके आत्म-संदेह चिह्न से ठीक हो सकती है और यह आपके करियर और जीवन के लिए विनाशकारी होगा। याद रखें, प्रकृति ने हमें अपने जीवन में हर विषम परिस्थिति और परिस्थितियों से निपटने और उनका सामना करने की अपार शक्ति प्रदान की है। हमारे समग्र विकास में हमारे ज्ञान और पूर्णता को बढ़ाने के लिए हमारे जीवन में निरंतर सीखने की आवश्यकता है।

7. आत्म-अनुशासन का अभ्यास करें

प्रतिदिन दोहराए जाने वाले नियमित कार्य आपको अपने भीतर आत्मविश्वास पैदा करने का तरीका प्रदान करेंगे और निश्चित रूप से यह नकारात्मक विचारों को आपसे दूर रखेगा, किसी से भी अपनी तुलना करने से बचें क्योंकि प्रकृति ने आपको विशेष क्षमताओं के साथ और आपके लिए विशेष कार्यकाल के लिए बनाया है। उन आत्मविश्वास निर्माण अभ्यासों का पालन करें ताकि यह नकारात्मक मानसिकता को आपसे दूर रख सके। याद रखें कि यह केवल आप ही हैं जो आपके दिमाग में नकारात्मक विचारों को पैदा करने का तरीका प्रदान करते हैं जो आपके जीवन की सभी क्रियाओं और रणनीति को बाधित करते हैं। 

टालमटोल से बचें: कार्यों को टालने के बजाय तुरंत निपटाएँ। सीमाएँ निर्धारित करें: विकर्षणों को सीमित करें और उत्पादकता के लिए अनुकूल वातावरण बनाएँ। खुद को पुरस्कृत करें: लक्ष्य प्राप्त करने के लिए खुद को पुरस्कृत करें, जो सकारात्मक व्यवहार को मजबूत करता है।

 8. प्रगति की निगरानी करें : 

अपनी प्रगति को ट्रैक करने, अपनी उपलब्धियों पर विचार करने और सुधार के क्षेत्रों की पहचान करने के लिए एक जर्नल रखें। नियमित समीक्षा: समय-समय पर अपने लक्ष्यों और दिनचर्या की समीक्षा करें ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वे आपकी आकांक्षाओं के अनुरूप हैं। 9. प्रेरित रहें

अपने जीवन में कुछ सीखने पर ध्यान केंद्रित करें और दूसरों से अपनी तुलना करने की आदत से बचें, यह आपके आत्मविश्वास के स्तर को कम करने में सबसे बड़ी बाधा है। एक बार जब आप अपने दृष्टिकोण, क्षमता और अन्य योग्यताओं की तुलना दूसरों से करना शुरू कर देते हैं, तो उसी समय आप दूसरों को कम आंकना शुरू कर देते हैं।

नजरिया जीने का: पतझड़ से सीखें, हर अंत में छिपी होती है नई शुरुआत, घबराएं नहीं


अक्सर हम पतझड़ के नाम  से हीं परेशान  हो जाते  हैं और  हमें। लगता  है कि बस  बहार  का मौसम ही जीवन है। 
जबकि  सच  यह है कि पतझड़  भी जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जैसे कि बसंत, ग्रीष्म, वर्षा और शिशिर ऋतुएं। 


पतझड़  का मौसम  तो  हमारे जीवन में आने  वाले बदलाव का संकेत  है। ठीक वैसे ही जैसे पतझड़ का  मौसम एक बदलाव की प्रक्रिया होती  है, जिसमें पुराने के स्थान पर नए की शुरुआत होती है।

पतझड़ से भी हमारे जीवन में सिखने के लिए काफी कुछ है, सच तो  जीवन का बहुमूल्य शिक्षा पतझड़ से हमें प्राप्त होता है जैसे  कि गिरना भी जीवन का हिस्सा है, पर फिर से खिलना हमारी ताकत है और हमें इसे अपने जीवन का आदर्श बनाना चाहिए ।

याद रखें  दोस्तों, हर गिरा हुआ पत्ता हमें अपने उम्मीदों की नई परिभाषा देते है और यह याद दिलाता है कि नया मौसम आने वाला है और हमें उसके आगमन के लिए अपनी बाहों को खोलकर तैयार  रहनी चाहिए।

वास्तव में  यह पतझड़ का मौसम  होता है हमें  समय के संदर्भ में कई सब सीखा जाता है।

सबसे पहला सीख जो हमें पतझड़ से सीखनी चाहिए वह हैवबदलाव की स्वीकृति: पतझड़ हमें सिखाता है कि बदलाव जीवन का एक आवश्यक हिस्सा है और उससे हमें डरना नहीं बल्कि स्वागत करना चाहिए।

यह हमारे वर्तमान परिस्थिति में परिवर्तन के साथ एक नई शुरुआत का भी संकेत है। पतझड़ के बाद बसंत आता है, जो नई शुरुआत का प्रतीक है।

यह हमारी सामान्य सोच है कि पतझड़ एक दुखद और बुरे दिनों का प्रतीक है। इस समय आपको धैर्य और साहस की जरूरत है जो कि प्रकृति  हमें सीखती है।ठीक उसी तरह जैसे अंधेरी रात के बाद सुबह नई रोशनी ले कर आती है.

जीवन पूरी तरह से अनिश्चितताओ से भरी हुई है और हम सदा अच्छे की उम्मीद हीं नहीं कर सकते। इस प्रकार से पतझड़ हमें जीवन की अनिश्चितता की याद दिलाता है।

जीवन का जो नियम है वह प्रकृति के अनुसार होती है हाँ हमें इसे समझने का हौसला और समझ  होनी चाहिए. याद रखें दोस्तो जीवन में हर  पतझड़ के बाद हरियाली लौटती है, बस थोड़ा धैर्य रखना होता है। जब जीवन बंजर लगे  और यह प्रतीत होने लगे कि अब जीवन कम कुछ खास नहीं रह ,गया है , तब याद रखें—यह बसंत से पहले का पतझड़ है।


नजरिया जीने का: भगवान राम के जीवन से सीखें कैसे सच्चे रिश्ते सुविधा नहीं, समर्पण से बनते हैं


हर रिश्ते की आधारशिला भरोसा है। जब आपको अपने साथी के निर्देशों पर भरोसा होता है और लगता है कि उनके इरादे उचित हैं, तो इससे शक्ति का संतुलन बनता है जो भागीदारों के बीच भावनात्मक संबंधों को लाभ पहुंचाता है। समर्पण एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है क्योंकि भागीदार स्वेच्छा से एक दूसरे के लिए बलिदान करते हैं, जिससे उनकी एकता मजबूत होती है।

सच्चाई तो यही है कि समर्पण से ही सच्चे रिश्ते बनते हैं. समर्पण की भावना से रिश्तों में दरार नहीं पड़ती. समर्पण से रिश्ते मज़बूत होते हैं और भावनात्मक संबंध गहरा होते हैं. 

मर्यादा पुरुषोतम भगवान राम का जीवन हमें काफी कुछ सिखाता है क्योंकि उनके जीवन की प्रत्येक घटना जीवन मे  संबंधों और आत्मीयता के भरोसा की बुनियाद जैसी है। कहते हैं नया की विश्ववास प्रेम की पहली सीढ़ी होती है और भगवान राम ने विश्वास के बदौलत हीं सबका दिल जीता है। 

वो एक पुत्र का धर्म निभाते हुए अपने जिन्होंने पिता की बात मानी और एक आदर्श पुत्र के रूप मे जाने गए। इसके साथ हीं भगवान राम एक आदर्श पति की भूमिका मे पत्नी की मर्यादा रखी।एक तरफ वो एक मित्र के रूप मे अपने सहयोगियों को को पर्याप्त  सम्मान दिया और सेवक को भी दोस्ती का दर्जा देने मे जरा भी संकोच नहीं किया। 

रामायण के प्रसंग का यदि आप अवलोकन करेंगे तो पाएंगे कि राम के जीवन की सबसे पहली परीक्षा तब आई जब उन्हें अयोध्या का राजा घोषित किया जाना था। लेकिन सौतेली माँ कैकेयी ने उन्हें वनवास भेजने की माँग कर दी।

 एक तरफ था राजपाठ, आराम, सम्मान। दूसरी ओर था जंगल, कष्ट और अनिश्चितता, लेकिन उन्होंने अविलंब वनवास स्वीकार किया और राज पाट को त्यागकर बिना कोई शिकायत किए, मुस्कुराकर वनवास स्वीकार को निकाल पड़ते हैं तो लक्ष्मण और सीता भी उनके साथ चलने को तैयार हो जाते हैं।  एक राजा की पत्नी होकर भी सीता जंगल की कुटिया में रहकर हर कष्ट में राम के साथ रहीं। कहा जाता है कि लक्ष्मण ने 14 वर्षों तक नींद नहीं ली और हर पल भगवान राम और सीता की सेवा मे लगे रहे। 

क्या यह रिश्ते मे एक समर्पण का भाव नहीं है?

 हमारा रिश्ता मूल रूप से आपसी सम्मान पर आधारित है। हमारे संबंध में विश्वास भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। स्वस्थ रिश्तों में, आपसी सम्मान और विश्वास तब प्रदर्शित होता है जब निर्णय लेने में हम एक-दूसरे के निर्णय को मानते हैं और अपनी निर्णय को थोपते हैं बल्कि एक सामंजस्य बैठाने का प्रयत्न किया जाता है। 

कठिन समय से विचलित होना कायरों का काम है

नजरिया जीने का: जिससे सारा जहां है, उसी का नाम है नारी@ जानें क्या कहती हैं ये नामचीन हस्तियां




 1.

नहीं समझो अबला अब, वक्त की रफ्तार है वो,
नित-नई ऊंचाइयों को छूने का नाम है अब नारी।

2.
दयालुता और ममता की मूरत भी है पर,
वज्र जैसे कठोरता का नाम है अब नारी।

3.
घर और कार्यस्थल का दिल और आत्मा है , पर
आत्मविश्वास से लबरेज, उम्मीदों का नाम है अब नारी।

4.

खुद को कमजोर समझना हीं तो भूल है तुम्हारी,
जिससे सारा जहां है, उसी का तो नाम है नारी।

5.

सृजन की जननी, और शक्ति का प्रतीक तुम्ही हो,
मेहनत और संघर्ष की मूरत, श्रद्धा की हकदार है हर नारी।

सेल्फ डिसप्लिन से बढ़ाएं अपना कॉन्फिडेंस 

महिला: जानें क्या कहती हैं ये नामचीन हस्तियां

  • एक शिक्षित महिला, एक सशक्त समाज की नींव होती है। - मिशेल ओबामा
  • स्त्रियों के बिना, दुनिया अधूरी है। – महात्मा गांधी
  • एक महिला  वह होती है, जो पूरे दिल से दुनिया को रोशन करती है। 
  • –ओपरा विन्फ्रे
  • लड़कियाँ सिर्फ इतिहास नहीं पढ़तीं, वे इतिहास बनाती हैं। 
  • – एलेनोर रूजवेल्ट
  • जब तक तुम स्त्रियों का आदर करना नहीं सीखोगे, तब तक तुम्हारी उन्नति संभव नहीं।-स्वामी विवेकानंद
  • स्त्री पुरुष की साथी है, न कि उसकी दासी। दोनों के अधिकार समान हैं।-महात्मा गांधी
  • स्त्री केवल सौंदर्य की प्रतिमूर्ति नहीं, वह सृजन और शक्ति का स्रोत है।-रवींद्रनाथ टैगोर
  • नारी वह दीप है, जो घर ही नहीं, समाज को भी उजाला देती है। -सरोजिनी नायडू
  • “जब क स्त्री शिक्षित होती है, तो एक संपूर्ण पीढ़ी शिक्षित होती है। -डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम

  • नारी में प्रेम की वह शक्ति होती है जो दर्द को भी दया में बदल देती है। -मदर टेरेसा
  • अगर स्त्रियां आगे नहीं बढ़ेंगी, तो समाज कभी आगे नहीं बढ़ेगा।
  • -सावित्रीबाई फुले
  • यदि तुम किसी समाज की वास्तविक स्थिति जानना चाहते हो, तो देखो कि वहां स्त्रियों की स्थिति क्या है। -पंडित जवाहरलाल नेहरू
  • “हर नारी के भीतर एक अद्भुत शक्ति छिपी होती है, उसे बस खुद पर विश्वास करना होता है।-ओपरा विनफ्रे


नजरिया जीने का: जानें कौन हैं कोमरम भीम जिनका चर्चा प्रधान मंत्री ने मन की बात में किया


प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 अक्टूबर 2025 को प्रसारित मन की बात के 127 वें संस्करण में महान विभूति कोमरम भीम का चर्चा किया। असम के रहने वाले महान विभूति कोमरम भीम की जयंती अभी 22 अक्टूबर को मनाई गई है। 

कोमरम भीम की चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने बताया की किस प्रकार से ऐसे कठिन समय में करीब बीस साल का एक नौजवान अन्याय के खिलाफ खड़ा हुआ था। उस दौर में जब निज़ाम के खिलाफ एक शब्द बोलना भी गुनाह था।

कोमाराम भीम भारत के एक गोंड जनजातीय नेता थे जिन्होने हैदराबाद की मुक्ति के लिये वहां के निजाम के साथ संघर्ष किया था. मन की बात कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा चर्चा करना अपनेआप में इस बात का सुबूत है कि उनका जीवन मोटिवेशनल रहा होगा. 

 उस नौजवान ने सिद्दीकी नाम के निज़ाम के एक अधिकारी को खुली चुनौती दे दी थी।  कोमाराम भीम ने  निजाम के आसफ़ जाही राजवंश के विरुद्ध संघर्ष किया और निजाम के न्यायालयी आदेशों, कानूनों और उसकी प्रभुसत्ता को सीधे चुनौती दी.  

कहा जाता है कि निज़ाम ने सिद्दीकी को किसानों की फसलें जब्त करने के लिए भेजा था। लेकिन अत्याचार के खिलाफ इस संघर्ष में उस नौजवान ने सिद्दीकी को मौत के घाट उतार दिया। वो गिरफ़्तारी से बच निकलने में भी कामयाब रहा। निज़ाम की अत्याचारी पुलिस से बचते हुए वो नौजवान वहाँ से सैकड़ों किलोमीटर दूर असम जा पहुंचा। 

प्रधान मंत्री मोदी ने चर्चा करते हुए कहा कि उस  महान विभूति कोमरम भीम की आयु बहुत लंबी नहीं रही, वो महज 40 वर्ष ही जीवित रहे लेकिन अपने जीवन-काल में उन्होंने अनगिनत लोगों, विशेषकर आदिवासी समाज के हृदय में अमिट छाप छोड़ी। 

ऐसा कहा जाता है कि  कोमरम भीम अल्लूरी सीतारामाराजू से प्रेरित थे और  उन्होंने  निज़ाम सरकार के जंगली आधिकारिक अन्याय के खिलाफ विद्रोह में महत्पूर्ण भूमिका निभाई. अपने आंदोलन और लोगों के प्रति उनके भरोसे ने कोमाराम भीम को विद्रोह की आग से भड़कते हुए लोगों के बिच एक वास्तविक देवता बन गए।

उन्होंने निज़ाम के खिलाफ संघर्ष कर रहे लोगों में नई ताकत भरी। वे अपने रणनीतिक कौशल के लिए भी जाने जाते थे। निज़ाम की सत्ता के लिए वे बहुत बड़ी चुनौती बन गए थे। 1940 में निज़ाम के लोगों ने उनकी हत्या कर दी थी। प्रधान मंत्री ने युवाओं से आग्रह किया कि  वे उनके बारे में अधिक से अधिक जानने का प्रयास करें उनके जीवन से प्रेरणा लें. 

सोमवार, 27 अक्टूबर 2025

नजरिया जीने का: थॉमस अल्वा एडिसन 'कमज़ोर छात्र' से महान वैज्ञानिक तक सफर


दुनिया के  महान वैज्ञानिकों में से एक थॉमस अल्वा एडिसन को कौन नहीं जानता है. जिज्ञासा और प्रयोगों ने ही उन्हें बल्ब, ग्रामोफोन और मूवी कैमरा जैसे आविष्कार करने की प्रेरणा दी और दुनिया में नाम कमाया. लेकिन क्या आप जानते हैं कि के शिक्षक ने उनकी माँ से कहा था  कि “आपका बेटा बहुत धीमा है, कुछ नहीं सीख सकता।” और इसके बाद उनकी मां ने बेटे को स्कूल से निकाल लिया और खुद पढ़ाया। 

याद रखें, अगर कोई आपको ‘कमज़ोर’ कहे और आपको हतोत्साहित करता है तो याद रखें यह उसके दृष्टिकोण है जो आपके प्रति है. आपके लिए वह सच्चाई तो है हैं नहीं क्योंकि  याद रखें कि शायद वो आपकी क्षमता नहीं पहचान पा रहा है और अपना विचार दे रहा है.

कहने का तात्पर्य है है कि  दूसरों के परसेप्शन को कभी भी खुद  पर इतना नहीं हावी होने दें कि हम खुद  वजूद को हीं भूल जाएँ. पतझड़ से सीखने के लिए यह सबसे अच्छी सीख जाओ कि हर अंत में छिपी होती है नई शुरुआत और एडिसन के तरह उन्हें स्कूल मास्टर द्वारा बेवकूफ या कमजोर मस्तिष्क का बता देना उनके सफर का अंत नहीं था. 

एडिसन ने आगे चलकर कई महत्वपूर्ण चीजों की खोज की, जिनमें बिजली का व्यावहारिक तापदीप्त (incandescent) प्रकाश बल्ब, फोनोग्राफ और मोशन पिक्चर कैमरा शामिल हैं। 

उन्होंने इन आविष्कारों के साथ ही बिजली उत्पादन और वितरण प्रणालियों का भी विकास किया, जिससे शहरी विद्युतीकरण का रास्ता प्रशस्त हुआ। 

फोनोग्राफ  का अविष्कार क्रन्तिकारी कदम था और  यह पहली मशीन थी जिसने  ध्वनि को रिकॉर्ड और पुन: प्रस्तुत कर देने का रास्ता दिए और आगे चलकर इस अविष्कार ने मनोरंजन और संचार के तरीकों में क्रांति ला दी। 

रविवार, 19 अक्टूबर 2025

नजरिया जीने का @पेरेंटिंग टिप्स - माता-पिता-बच्चे के रिश्ते को ऐसे करें मजबूत



आज कि जीवन स्टाइल मे जहां सबके पास काफी हेक्टिक लाइफ सेडयूल है और घर से ऑफिस तक का स्ट्रेस सभी पेरेंट्स पर हावी हो चुका है। सवाल है कि  ऐसे लाइफ स्टाइल मे उन बच्चों के लिए हम पेरेंट्स कितना न्याय  कर पाते हैं जिनके लिए हीं हम ये तमाम स्ट्रेस लेते हैं। मत-पिता और बच्चों के रिश्ते को मजबूत बनाने के लिए प्यार, विश्वास और समझ की ज़रूरत होती है। यहाँ कुछ पेरेंटिंग टिप्स दिए गए हैं जो आपके रिश्ते को और बेहतर बना सकते हैं:


बच्चों के साथ समय बिताएं

तमाम व्यस्तताओं के वावजूद आप अपने बच्चों के साथ दिन का कुछ समय सिर्फ और सिर्फ उनके लिए रखें। बच्चों के साथ जब आप हों तब सिर्फ उनकी सुने  और अपनी परेशानियों को खुद से दूर रखे क्योंकि आपकी परेशानी आप से अधिक  आपके बच्चों के लिए हानिकारक हो सकती है। याद रखें, हमारी परेशानियों कि चर्चा के लिए हमारे पार्टनर हैं, बच्चे नहीं। 

बच्चों से खुलकर बात करें

बच्चों के साथ अगर आप हैं तो  सब से पहले उन्हे यह विश्वास दिलाएं कि आप सिर्फ उनके लिए उनके साथ हैं और उनकी बातों को ध्यान से सुनें। उनकी बातों को सुनने के साथ ही उनके परेशानियों को समझे कुछ ऐसे कि  वो आपसे कुछ भी छिपायें नहीं। इसके साथ ही आप उनकी भावनाओं को समझने की कोशिश करें। जब बच्चा किसी समस्या से गुज़र रहा हो, तो उसे भावनात्मक सहारा दें साथ ही उन्हें बताएं कि आप हर परिस्थिति में उनके साथ हैं।

प्रशंसा और प्रोत्साहन दें

प्रशंसा और प्रोत्साहन कि भूख भला किसे नहीं होती है। वो कहते  हैं ना  कि "प्रेम से जानवरों को भी वश मे किया जा सकता है।" बच्चों को प्रेम प्रदर्शित करें और उनकी प्रसंशा करें। बच्चों को उनकी छोटी-छोटी उपलब्धियों पर भी उनकी सराहना करें और उन्हे प्रोत्साहित करें ताकि उन्हे लगे कि उसने कुछ अच्छा किया है। 

घर में अनुशासन के लिए नियम बनाएं 

अनुशासन कि महत्व को उन्हे समझने और घर मे भी उचित माहौल रखें। खुद भी अनुसाशन का पालन करें और उन्हे यह अहसास दिलाएं कि अनुसाशन का महत्व जीवन मे कितना महत्वपूर्ण है। बच्चे अक्सर अपने माता-पिता की आदतें और व्यवहार अपनाते हैं इसलिए, वैसा ही व्यवहार करें जैसा आप उनसे अपेक्षा करते हैं।


नजरिया जीने का: तत्काल लाभ देने वाले मुफ़्त की चीजों को अवॉइड करें, दूरगामी कुप्रभाव को पहचानें


 नजरिया जीने का: अगर आपको बिना किसी प्रयास या किसी मशक्कत के चीजों का मिलना किसी भी समाज या किसी भी संस्थान से आरंभ हो जाए, तो समझ लीजिए की आप किसी भयंकर गुलामी की ओर बढ़ रहे हैं। 

विश्वास नहीं हो तो इतिहास उठा कर देख लीजिए, दुनिया के उन देशों ने जिन्हे बिना किसी प्रयास के खाने की आदत लग गई उन्हे उन शक्तिशाली देशों ने अपना गुलाम बना कर वहाँ के लोगों की पीढ़ियों पर शासन किया है। 


यह बिल्कुल मानी हुई बात है कि मुफ्त की चीजें देखने में अच्छी लगती हैं, लेकिन यह भी एक सच्चाई है कि ये  चीजें हमें अक्सर महँगी पड़ती हैं। 
आप  इसके लिए मुफ्त में पाए जाने वाले सुविधाओं और मिले रेवरियों का अध्ययन कर यह देख लें। 
 अध्ययन पर अगर आप गौर करेंगे तो मुफ्त के मिलने वाले इन सेवाओं के बदले में आपको भविष्य में ज्यादा पे करने पड़ते हैं यह तथ्य आपको सोचने पर मजबूर करता है कि इन चीजों को लेने से पहले उनकी मूल्यांकन करना चाहिए.

 दुनियाँ के दांव पेंच से रखना न वास्ता 
मंजिल तुम्हारी दूर है लंबा है रास्ता 
 भटका न दे कोई तुम्हें धोखे में डाल के
-प्रदीप 

मुफ्त की चीजें अक्सर ऐसी होती हैं जिनका कोई निर्धारित मूल्य नहीं होता है या जिन्हें किसी अन्य उत्पाद के साथ सब्सिडी के रूप में प्रदान किया जाता है, जैसे सरकारी योजनाएं या नमक के मुफ्त बाटे। लेकिन यह भी सच है कि इन चीजों को सब्सिडी के रूप में प्रदान करने के लिए सामान्यतः किसी अन्य स्रोत से धनराशि उठाई जाती है, जिसे फिर सामरिक या आर्थिक रूप से भुगतान करना पड़ता है.

यह ध्यान में रखें कि यदि कोई चीज़ मुफ्त है, तो उसे अपने उत्पादन, प्रदान और वितरण के लिए कोई मूल्यांकन या मानक नहीं होता है, जिससे उसका गुणवत्ता और मान्यता बाढ़ सके. इसलिए, मुफ्त की चीजों का उपयोग करते समय हमें अपने निर्णयों को सावधानीपूर्वक चुनना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हमें कोई अनुमति प्राप्त है और हम इसकी वास्तविक मूल्य को समझते हैं.

व्यापार की दृष्टि से भी, यदि कोई व्यक्ति निरंतर मुफ्त चीजें प्राप्त करने का आदान-प्रदान करता है, तो वह उस व्यक्ति के लिए लाभदायक नहीं होगा क्योंकि व्यापारिक मानकों में इन चीजों का मूल्य होता है और उनका उपयोग करने के लिए समय, ऊर्जा और संसाधन की आवश्यकता होती है. इसलिए, सामान्यतः, मुफ्त चीजें संभावित हैं कि उन्हें बहिष्कार करने के बजाय, उसकी वास्तविक मूल्य का मान्यांकन करना और उसे उचित मानदंडों के अनुसार खरीदना और उपयोग करना उचित होगा.

मुसीबतों को देख कर क्यों डरता है,

तू लड़ने से क्यों पीछे हटता है।

किसने तुमको रोका है,

तुम्ही ने तुम को रोका है।

भर साहस और दम, बढ़ा कदम,

अब इससे अच्छा कोई न मौका है।

-नरेंद्र वर्मा

संक्षेप में कहें तो, मुफ्त की चीजों को बहिष्कार करने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन हमें यह समझना चाहिए कि उनकी मूल्यांकन करने और संभावित नुकसानों को समझने की आवश्यकता होती है और उन्हें उचित रूप से उपयोग करने के फायदों और नुकसानों को विचार में रखना चाहिए।


नजरिया जीने का: प्रकृति और जीवनदायिनी शक्ति के प्रति सम्मान व्यक्त करने का एक अद्वितीय माध्यम भी है छठ पूजा


छठ पूजा न केवल पर्व धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से भी अत्यधिक महत्वपूर्ण है, बल्कि यह समाज के सभी वर्गों मे समान रूप से मनाने की भावना को दर्शाता है। छठ पूजा के दौरान सभी लोग जाति और धर्म से परे एकत्र होकर पूजा करते हैं, जिससे समाज में एकता और सामूहिकता की भावना प्रबल होती है। छठ पूजा को सिर्फ धार्मिक परंपराओं और संस्कृति से जोड़ कर नहीं देखा जाना चाहिए क्योंकि अगर अगर आप इस आस्था के महा पर्व को गंभीरता से अवलोकन करेंगे तो यह सिर्फ धार्मिक विषय से नहीं बल्कि यह प्रकृति और जीवनदायिनी शक्ति के प्रति सम्मान व्यक्त करने का एक अद्वितीय माध्यम है।

छठ पूजा 05 नवंबर, 2024 से मनाई जाएगी। छठ पूजा 2024 भगवान सूर्य (सूर्य देव) और छठी मैया को समर्पित एक प्रिय हिंदू त्योहार है। यह अत्यधिक भक्ति को समर्पित त्योहारों में से एक है जिसे उत्तर प्रदेश, झारखंड, बिहार, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल के राज्यों में व्यापक रूप से मनाया जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, चार दिवसीय त्योहार दिवाली के ठीक छह दिन बाद कार्तिक के चंद्र महीने के छठे दिन से शुरू होता है। छठ पूजा सादगी, पवित्रता और अनुशासन के मूल्यों को बनाए रखने के साथ संपन्न होने का प्रतीक है। आम तौर पर पारंपरिक कैलेंडर के अनुसार, कार्तिक माह, शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को सूर्य को शाम का अर्घ्य दिया जाता है। शाम के अर्घ्य के दिन, भक्त भगवान सूर्य को अर्घ्य देते हैं और नदी या तालाबों के किनारे आस-पास के क्षेत्र में जाते हैं जहाँ भक्त और उनके परिवार डूबते सूर्य को अर्घ्य देने के लिए एकत्र होते हैं।

सच्चे रिश्ते सुविधा से नहीं, समर्पण से बनते हैं

भक्त अपने परिवार के सदस्यों और पूरे मोहल्ले और लोगों के साथ नदी/तालाब के किनारे इकट्ठा होते हैं और यह उत्सव की एक अनूठी भावना पैदा करता है जिसे एक कार्निवल कहा जा सकता है। चूंकि छठ पूजा की विजय उच्च स्तर पर है और वास्तव में छठ पूजा का न केवल आध्यात्मिक या धार्मिक पहलुओं के लिए अपना बहुत बड़ा महत्व है, बल्कि छठ पूजा का अपना महत्व है जिसमें सूर्य और छठी माता (देवी छठी) की पूजा भी की जाती है।

जीवन में सफल होना चाहते हैं तो प्रसन्न रहना सीखिए

संध्या अर्घ तीसरा दिन है और चौथे दिन भक्त सूर्योदय और पारण करते हैं। आप छठ पूजा की सभी विधि को महत्वपूर्ण तिथियों और छठ पूजा कैसे करें, इस लेख में विस्तार से देख सकते हैं।

छठ पूजा  कार्तिक शुक्ल षष्ठी को मनाई जाती है, जिसे आमतौर पर दीपावली के ठीक 6 दिन बाद मनाया जाता है। हिंदी कैलेंडर के अनुसार, छठ पूजा का त्योहार नहाय खाय से शुरू होता है, जो इस भव्य उत्सव का पहला चरण है। छठ पूजा के सभी प्रमुख चार चरण हैं- नहाय-खाय, खरना, संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ और पारण।

छठ पूजा का पहला दिन: नहाय-खाय

छठ पूजा का दूसरा दिन: लोहंडा और खरना

छठ पूजा का तीसरा दिन: संध्या अर्घ्य

छठ पूजा का चौथा दिन: उषा अर्घ और पारण

हालाँकि छठ पूजा की शुरुआत मूल रूप से बिहार से हुई थी, लेकिन आजकल छठ पूजा भारत के लगभग सभी हिस्सों में मनाई जाती है। बिहार ही नहीं, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल देश को छठ पूजा का सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र कहा जा सकता है।

जिससे सारा जहां है, उसी का नाम है नारी

छठ पूजा का चार दिवसीय त्यौहार भी सर्दियों के मौसम में मनाए जाने वाले छठ पूजा की तरह ही महत्वपूर्ण है। नहाय खाय के ठीक बाद, दूसरे दिन यानी खरना से उत्सव शुरू होता है।

नजरिया जीने का: धोखा देने वाले लोग चेहरे से नहीं, वक़्त से पहचाने जाते हैं


हर मुस्कुराता चेहरा सच्चा नहीं होता, इसलिए नज़रें ही नहीं, दिल से पहचानना सीखो यह बात जीवन का यथार्थ
है, लेकिन विडम्बना यह है कि हम सभी वास्तविकता को भुलाकर और खुशफहमी में जीने का अभ्यस्त हो चुके है. जीवन में हम सभी को कभी न कभी ऐसे लोगों से सामना करना पड़ता है जो सामने से हमारे हितैषी दिखते हैं और उन्हें देखकर यह प्रतीत होता है कि संसार में इससे बड़ा कोई हमारा अपना नहीं हो सकता, लेकिन विडम्बना यह है कि उनको पहचानने में इतना देर हो चुका होता है कि हमारे पास हाथ मलने के अलावा कुछ नहीं बचता.




याद रखें, ऐसे लोग सिर्फ अपने स्वार्थ के लिए हमारे करीब आते हैं और जब ज़रूरत पड़ती है तो सबसे पहले मुंह मोड़ लेते हैं। इसलिए जरूरी है कि हम इन्हें पहचानें और इनसे बचना सीखें। याद रखें, हर मुस्कुराता चेहरा सच्चा नहीं होता, इसलिए नज़रें ही नहीं, दिल से पहचानना सीखो।

जीवन में हमेशा मीठी ज़ुबान वाले से सावधान रहो, क्योंकि सबसे ज़हरीली बातें अक्सर मीठे लफ़्ज़ों में छुपी होती हैं और यह हमारी भोलापन और उदारता है जो हमें रिश्तों में संकीर्ण नहीं होने देती.

हर वो रिश्ता खोखला है जिसमें भरोसा नहीं, और जहाँ भरोसा टूटा, वहाँ बस धोखा ही बचता है और जितनी जल्दी आप इसे समझ लेंगे, आप का जीवन सुखमय हो जाएगा. धोखेबाज़ लोगों की जीत थोड़ी देर की होती है और इसके बदले में वो अपना विश्वसनीयता हीं खो देते हैं,नलेकिन ईमानदार इंसान की पहचान हमेशा रहती है।"