शनिवार, 18 अक्टूबर 2025

नजरिया जीने का: स्वस्थ जीवन जीने का आधार- संतुलन, अनुशासन और सकारात्मक सोच


जो अपने शरीर का ख्याल रखता है, वही सच में अपने जीवन का सम्मान करता है और आपके पास स्वस्थ जीवन है फिर तो चाहे वह परिवार  हो,समाज हो देश हो या दुनिया, आप अपनी उपस्थिति और पहचान  बना सकते हैं. अगर  आप स्वस्थ हैं तो फिर आप  अपने परिवार के लिये भी सहायक उम्मीद की किरण है, लेकिन अगर  अस्वस्थ हैं तो फिर परिवार को हीं आपके सेवा  लगा रहना होगा. 

कहा जाता है – “स्वास्थ्य ही धन है”, क्योंकि यदि शरीर स्वस्थ नहीं है, तो जीवन की सारी खुशियाँ फीकी लगने लगती हैं। असली सुख, शांति और सफलता का आधार एक स्वस्थ शरीर और मन है। चाहे हमारे पास कितना भी पैसा, नाम या शोहरत हो, यदि हम बीमार हैं तो इन सबका कोई अर्थ नहीं रह जाता।

 हम बचपन के इसे पढ़ते थे कर इसके सहारे हीं बड़े हुए है कि- "धन खो जाने पर कुछ नहीं खोता, समय खो जाने पर थोड़ा खोता है, पर स्वास्थ्य खो जाने पर सब कुछ खो जाता है।"

कोरोना के बाद  जिस प्रकार से लोगों के जीवन का महत्व पता चला है  उससे साफ़ तौर पर यह मान लिया जाना चाहिए कि स्वास्थ्य के बदौलत हीं आपका सर्वाइवल सुनिश्चित है. 

स्वस्थ रहने के लिए हमें संतुलित आहार लेना चाहिए, नियमित व्यायाम करना चाहिए और पर्याप्त नींद लेनी चाहिए। प्रकृति के साथ समय बिताना, योग और ध्यान करना भी मानसिक स्वास्थ्य के लिए बहुत उपयोगी है। 

आज की व्यस्त जीवनशैली में लोग तनाव और असंतुलित दिनचर्या के कारण बीमारियों के शिकार हो रहे हैं, इसलिए जरूरी है कि हम अपने शरीर का ख्याल रखें। आज हमें इस चीज को समझने की जरुरत है कि पैसे से दवा खरीदी जा सकती है, पर स्वास्थ्य नहीं और दवा के नाम पर जिस संताप और मानसिक  शारीरिक प्रताड़ना से आप गुजरते हैं, उससे अच्छा है कि हम इसे जीवन का मन्त्र बनाकर चलें कि   “स्वस्थ रहना ही सबसे बड़ी सफलता है।”

स्वस्थ व्यक्ति न केवल खुद के लिए, बल्कि समाज और परिवार के लिए भी उपयोगी होता है। इसलिए हमें यह समझना चाहिए कि असली दौलत हमारे बैंक अकाउंट में नहीं, बल्कि हमारे अच्छे स्वास्थ्य में छिपी है। इसके साथ ही यह भी जीवन का अल्टीमेट सच्चाई है कि “जो अपने शरीर का ख्याल रखता है, वही सच में अपने जीवन का सम्मान करता है।”

शुक्रवार, 17 अक्टूबर 2025

करियर टिप्स @नजरिया जीने का: अपनी ख़ामोशी को आवाज़ दें, प्रयास से सफलता का शोर करें


चुप रहकर सपने देखना आसान है, उन्हें पूरा करना का हिम्मत और साहस करना हीं असली पुरुषार्थ की पहचान है.  जीवन एक संघर्ष है और इसके रास्ते में कई सारे ऐसे पड़ाव और  पल आते हैं जब हम अपने मन की बातें, अपने सपनों की गूंज, और अपनी क्षमता को चुपचाप दबा देते हैं। हालाँकि यह हमारे व्यक्तित्व के साथ अन्याय की तरह है क्योंकि अगर हम चुप रहेंगे तो हमारे अंदर की हिम्मत और साहस की पहचान भला कैसे हो पायेगी.  

सच यह है कि चुप रहने से दुनिया हमें नहीं पहचानेगी। अपने अस्तित्व को पहचान दिलाने के लिए, अपनी आवाज़ को दुनिया तक पहुँचाने के लिए हमें अपनी और से पूर्ण प्रयास करने होंगे और इसके लिए  हमें खुद के वजूद को भी मिटाने से नहीं हिचकनी चाहिए. 

अगर आप अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के रास्ते में खामोश है तो इस ख़ामोशी का मतलब हार नहीं है बल्कि यह ख़ामोशी कभी-कभी गहरी सोच और तैयारी का प्रतीक होती है। 



मनमुटाव को दूर कर फिर से संवाद शुरू करना सीखे 


लेकिन ध्यान रखें, अगर यह ख़ामोशी हमेशा बनी रहे, तो यह हमें दुनिया से पीछे कर देती है और फिर हम अपने सपने से पीछे हो जाते हैं. इसके लिए जरुरी है कि समय रहते सही समय पर अपनी सोच को शब्द और कर्म में बदलना ज़रूरी है।

याद रखें, जब आपकी मेहनत बोलती है, तो दुनिया चुप होकर सुनती है क्योंकि तब आपके प्रयास नहीं बल्कि उनका परिणाम दुनिया के सामने होता है. मुंशी प्रेमचंद के उस कथन को हमेशा याद रखें -" सफलता में दुर्गुणों को छुपा देने की अद्भुत क्षमता होती है. "

 सपनों और हकीकत के बीच की दूरी है एक्शन

याद रखें आपकी प्रयास की ताकत हीं  आपकी असली आवाज है  असली आवाज़ है क्योंकि लोग आपकी बातों से ज़्यादा आपके काम को सुनते हैं। विश्व प्रसिद्ध क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर के उस कथन को हमें हमेशा याद रखनी चाहिए जब उनहोंने मिडिया द्वारा उनके फॉर्म को लेकर टिपण्णी और नकारात्मक आभामंडल बनाई गई थी. तब उन्होंने कहाँ था कि -"हमारा बल्ला बोलेगा।"

कठिन समय से विचलित होना कायरों का काम है

करियर टिप्स @नजरिया जीने का: सपनों और हकीकत के बीच की दूरी है एक्शन, इसे साकार करें

नजरिया जीने का: यह सही है कि सफलता देखने के लिए पहले हमें उसका सपना देखना जरूरी है क्योंकि बिना उसके आप अपना लक्ष्य नहीं बना सकते। लेकिन यह भी सच है कि सपने देखना आसान है, लेकिन उन्हें हकीकत में बदलने के लिए हमें व्यापक स्ट्रैटिजी और उनके इम्प्लिमेन्टेशन के साथ ठोस एक्शन भी जरूरी है। बहुत से लोग बड़े सपने देखते हैं, लेकिन वही लोग सफल होते हैं जो उन सपनों को साकार करने के लिए लगातार, सही दिशा में मेहनत करते हैं। याद रखें दोस्तों, सिर्फ सोचने से कुछ नहीं बदलता, क्योंकि उसे सच मे बदलने के लिए हमें पहला कदम तो उठाना हीं होगा। लक्ष्य को पाने के लिए आप पहला कदम उठाएं, बाकी रास्ता खुद बनता जाएगा जो कि आपके सपने को हकीकत मे बदलने का मार्ग प्रशस्त करेगा। 

सपने आपके जीवन के लिए आपकी उम्मीदों, इच्छाओं और आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं और वास्तविकता आपके जीवन की वर्तमान स्थिति है जो आपकी वर्तमान उपलब्धियों को दर्शाती है। लेकिन सपने देखना ही उसे सच करने के लिए काफी नहीं है। इसे हकीकत में बदलने के लिए, यह एक्शन है जो उपाय प्रदान करता है और सपनों और हकीकत के बीच एक पुल बनाता है। यह वह प्रयास है जो आप अपने सपने को सिर्फ़ एक विचार से मूर्त रूप देने के लिए करते हैं।

कार्रवाई करना वह पुल है जो हमारे सपनों को हकीकत से जोड़ता है क्योंकि आपके सपनों और हकीकत के बीच की दूरी को केवल प्रयासों और रणनीति के साथ ही भरा जा सकता है। बिना कार्रवाई के, हमारे सपने सिर्फ़ इच्छाएँ ही रह जाते हैं। यह हमारे प्रयासों और दृढ़ संकल्प के माध्यम से है कि हम अपनी आकांक्षाओं को जीवन में लाते हैं। तो, आइए अपने सपनों को हकीकत में बदलने की दिशा में वे कदम उठाएँ, चाहे वे कितने भी छोटे क्यों न हों।

सिर्फ टैलेंट या स्किल नहीं, खुद के अंदर का जुनून है जरूरी

याद रखें, अगर आपका सपना अपने जीवन में एक सफल व्यक्ति बनना है, तो सिर्फ़ इसके बारे में सपने देखने से आप वहाँ नहीं पहुँच पाएँगे। आपको संबंधित क्षेत्र में लगातार कदम उठाने की जरूरत है, अपने कौशल में सुधार करना, फीडबैक मांगना, अपना काम जमा करना, इत्यादि। आपके द्वारा की जाने वाली हर कार्रवाई आपको अपने सपने को साकार करने के करीब ले जाती है। सरल शब्दों में, यदि आप कुछ हासिल करना चाहते हैं, तो आपको इसके लिए ठोस कदम उठाने होंगे। चाहे वह लक्ष्य निर्धारित करना हो, योजना बनाना हो, कौशल हासिल करना हो या प्रयास करना हो, कार्रवाई ही आपके सपनों को हकीकत में बदल देती है।

इस अंतर को पाटने के लिए आप कुछ चीजें कर सकते हैं:

लक्ष्य निर्धारित करें: अपने सपनों को छोटे, प्राप्त करने योग्य चरणों में विभाजित करें। इससे वे कम भारी लगेंगे और आपको अपनी प्रगति को ट्रैक करने में मदद मिलेगी।

कार्रवाई करें: "सही" क्षण की प्रतीक्षा न करें, बस शुरू करें! आगे बढ़ने के लिए छोटे कदम भी स्थिर रहने से बेहतर हैं।

दृढ़ रहें: रास्ते में रुकावटें आएंगी। उन्हें आपको हतोत्साहित न करने दें। बस आगे बढ़ते रहें।

सौंदर्य और कुरुपता के धोखे से निकलना सीखे 

 आप अपने जीवन में खुद को प्रोत्साहित करने के लिए अलग-अलग दर्शन या प्रेरणा उद्धरणों का पालन करने के लिए स्वतंत्र हैं, लेकिन अंतिम जीवन की एक पंक्ति की परिभाषा यह है कि "सपनों और वास्तविकता के बीच की दूरी को कार्रवाई के रूप में जाना जाता है।"

"यह कहना मुश्किल है कि क्या असंभव है, क्योंकि कल का सपना आज की आशा और कल की वास्तविकता है।" - रॉबर्ट एच. गोडार्ड

यह कहने की आवश्यकता नहीं है कि यह हमारा दृष्टिकोण है जो हमारे सामने आने वाली समस्याओं की मात्रा और आकार को तय करता है। हमारे जीवन में किसी समस्या और कठिनाई का सामना करना जीवन का एक हिस्सा है और आप इससे बच नहीं सकते। हालाँकि, आप अपने जीवन में असंभव शब्द को परिभाषित करते समय एक नया दृष्टिकोण अपना सकते हैं।

हम सभी बचपन से ही जीवन के इस तथ्य से परिचित हैं कि 'कार्य के बिना विचार गर्भपात है' और जब हमारे जीवन में कुछ सबक लागू होने चाहिए, तो हम भ्रम की स्थिति में होते हैं।

प्रकृति कहती थी कि सपना आपके दिमाग में इसलिए आया क्योंकि यह आपकी पहुँच में था और आपके पास इसे वास्तविकता में बदलने की शक्ति है।

लेकिन आश्चर्यजनक रूप से हमें अपनी असीम संभावनाओं पर विश्वास नहीं है और यह हमारी नकारात्मक मानसिकता है जो हमें लक्ष्य प्राप्त करने के लिए अपनी रणनीतियों को क्रियान्वित करने हेतु कार्रवाई करने से विचलित करती है।


सोमवार, 13 अक्टूबर 2025

नजरिया जीने का: जीवन मे सफलता जरूरी है, पर क्या हर कीमत पर?



सच बेहद कड़वा होता है और इससे शायद हीं कोई इंकार करे, मगर हकीकत यह भी है कि सच्चाई और ईमानदारी को हीं हमारे बाद लोग याद करते हैं और उसी से जीवन की असली पहचान होती है। झूठ और फरेब की दुनिया से कमाए गए धन कितने दिन रहते हैं भला। और सबसे बड़ी विडंबना भी हमारी यही है कि हम सभी इस सच्चाई से परिचित हैं, फिर अपनी व्यवहार और अंतरात्मा को समझा पाने मे विफल है। जैसे कि डॉक्टर एस राधाकृष्णन ने कहा था-"The great tragedy for we Indian is that we know the right but do the wrong."

बेईमानी से भली है सर उठाकर जीने की  कला 

यह ठीक है कि जीवन मे सच्चाई का रास्ता दर्द और काँटों भरा  होता है और उसपर चलना मुश्किल होता है, लेकिन क्या यह इतना भी मुश्किल होता है जिसपर हम ईमानदारी और सम्मान से चल नहीं सकता। जीवन मे हर मुस्कान के पीछे एक दर्द छुपा होता है, लेकिन तात्कालिक खुशी के लिए क्या सच्चाई और ईमानदारी से विमुख हो कर बेईमानी और अनैतिकता का जीवन जीना भला किस प्रकार की  समझदारी है। सच्चाई से जीने का मजा यह भी है है कि हमें अपने सर को किसी के आगे झुकाना नहीं पड़ता.

सफलता है आपके जीवन का पैमाना 

इस सच्चाई से भला किसको इनकार हो सकता है कि दुनिया सिर्फ उगते हुए सूरज को पूछती है और सफलता हीं वह पैमाना है जिसके परैमिटर पर हम सभी को तौलकर ही आपकी कीमत लगाई जाती है। लेकिन यह भी याद रखें, जीवन मे सफलता के लिए भी कुछ शर्ते हैं और उनकी कीमत पर हीं आप सफल होंगे और ये दुनिए आपको तब तक नहीं पूछेगी जब तक आप सफल नहीं हो जाते।

हर रिश्ता स्वार्थ से भरा नहीं होता 

हाँ, हर रिश्ता स्वार्थ से भरा होता है, लेकिन इसका मतलब यह कदापि नहीं है कि हर रिश्ते को हम स्वार्थ के तराजू पर तौल कर हीं उसके वास्तविकता को पहचाने। दूध पिलाने वाली एक माँ को भला उसे गोद मे बच्चे से क्या स्वार्थ हो सकता है? अगर हम यह कहें कि वह अपने बुढ़ापे के सहारा के लिए यह कर रही है तो इतना वास्तविकता उस माँ को भी पता है कि यह इनवेस्टमेंट खतरे से भरा  है क्योंकि आज इतने बड़े पैमाने पर खुद रहे वृद्धाश्रम इस बात की गारंटी है कि कम से कम आज के पेरेंट्स को अपने बच्चों से उतना उम्मीद लगाना खतरे से खाली नहीं। 


शनिवार, 11 अक्टूबर 2025

नजरिया जीने का: Self Discipline की ज़रूरत क्यों और इसे जीवन में कैसे अपनाएँ


गौतम बुद्ध की उस कोट्स को जरूर पढ़ा होगा  सेल्फ डिसिप्लिन और खुद पर नियंत्रण के लिए सबसे प्रभावी उक्ति है-

" जिसने खुद पर जीत पा ली, उसने दुनिया पर जीत पा ली।” यह एकमात्र सत्य  हम सभी जानबूझकर कर अनजान बने हुए हैं. सेल्फ डिसिप्लिन या आत्म-अनुशासन एक महत्वपूर्ण कौशल है जो आपको अपने विचारों, भावनाओं और व्यवहार को नियंत्रित करने की क्षमता प्रदान करता है ताकि आप अपने जीवन में महत्वपूर्ण लक्ष्यों को प्राप्त कर सकें। जीवन में आत्म-अनुशासित होने से, हम अपनी योजनाओं पर टिके रहने और अपने लक्ष्यों को पूरा करने की अधिक संभावना रखते हैं। इसलिए अपने जीवन में आत्म-अनुशासन के पाँच स्तंभों को हमेशा याद रखें - स्वीकृति, इच्छाशक्ति, कड़ी मेहनत, परिश्रम और दृढ़ता।



आत्म-अनुशासन आपके जीवन के हर प्रयास में अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण कारक है और आत्म-अनुशासन के अभ्यास ही आपको अपने सपनों को प्राप्त करने के लिए आवश्यक कार्य करने की क्षमता प्रदान करते हैं। 

याद रखें, यह सेल्फ डिसिप्लिन या आपके खुद पर नियंत्रण करने की क्षमता हीं है जो जीवन की दिशा तय करता है. हम अज्ञानतावश जीवन में आने वाले परिस्थितियों को दोष देते रहते हैं लेकिन सच यह है कि जो चीज हमारे नियंत्रण में नहीं है, इसे भला दोष क्या देना. उन परिस्थितयों से निबटने के लिए हमारा सेल्फ डिसिप्लिन या स्व अनुशासन हीं वह कदम है जो उन परिस्थितियों से निकलने में मदद करता ही. 

सेल्फ डिसिप्लिन कोई सज़ा नहीं, बल्कि स्वयं से किया गया वादा है — अपने बेहतर रूप को बनाने का। जब हम अपने मन, समय और आदतों पर नियंत्रण पा लेते हैं, तभी असली सफलता हमारे कदम चूमती है।

आत्म-अनुशासन का अभ्यास न केवल आपके जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह आपके जीवन को हमेशा सही रास्ते पर ले जाता है. 

आत्म-अनुशासन हमें अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करता है। जब हम आत्म-अनुशासन रखते हैं, तो हम अपनी योजनाओं पर टिके रहने और अपने लक्ष्यों को पूरा करने की अधिक संभावना रखते हैं।

यह हमें अच्छी आदतें विकसित करने में मदद करता है। आत्म-अनुशासन हमें अच्छी आदतें विकसित करने में मदद कर सकता है, जैसे स्वस्थ भोजन करना, नियमित व्यायाम करना और पर्याप्त नींद लेना।

यह हमें तनाव प्रबंधन में मदद करता है। जब हम अपने तनाव के स्तर को नियंत्रित कर पाते हैं, तो हम चुनौतियों और असफलताओं का बेहतर ढंग से सामना कर पाते हैं।

यह हमें आत्म-सम्मान बढ़ाने में मदद करता है। जब हम अपने लक्ष्य प्राप्त करते हैं, तो हमें उपलब्धि और गर्व की अनुभूति होती है। इससे हमें अपना आत्म-सम्मान और आत्मविश्वास बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

जो व्यक्ति अपने जीवन में आत्म-अनुशासित होते हैं, वे अपने नियम बनाते हैं और उन नियमों का दृढ़ता से पालन भी करते हैं... इन व्यक्तियों में अपनी सीमाएँ निर्धारित करने और अपने लक्ष्यों के लिए अपने मन का मार्गदर्शन करने के प्रबल गुण होते हैं... शुरुआत में एक अनुशासित व्यक्ति बनना मुश्किल हो सकता है, लेकिन दिशानिर्देशों का पालन करना और उनका आदी होना मुश्किल नहीं है। अनुशासित व्यक्ति अपने मन को अपने मन पर हावी होने देते हैं और अपनी भावनाओं को नियंत्रित कर सकते हैं और अपने द्वारा बनाए गए नियमों का पालन करने में कोई कसर नहीं छोड़ते।

टालमटोल करना अगर आपके व्यक्तित्व का हिस्सा बन चूका है तो उसपर तत्काल नियंत्रण पाएं क्योंकि आपके जीवन में सफलता की राह में यह सबसे बड़ा रोड़ा है.  उसके बदले आप अपने जीवन में सेल्फ डिसिप्लिन के नियमों का पालन करें और “अभी नहीं तो कभी नहीं” का सिद्धांत अपनाएँ।स्व अनुशासन को अपने जीवन का हिस्सा बनायें और जीवन का यह मूल मन्त्र बनाएं कि  हर काम के लिए सही समय अभी अर्थात वर्तमान  है।

आत्म-अनुशासन ही एकमात्र और अंतिम कारक है जो आपके विचारों और व्यवहार में बदलाव लाने की क्षमता रखता है. जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए, अपने विचारों का स्वामी बनना आवश्यक है और आपको आत्म-अनुशासित जीवन जीने का आदी होना होगा...अपनी सभी गलत और बुरी आदतों को समय पर और अपनी क्षमता के अनुसार नियंत्रित करना चाहिए, अन्यथा वे आपके व्यवहार, व्यक्तित्व और आपके समग्र जीवन का हिस्सा बन सकती हैं.

गुरुवार, 9 अक्टूबर 2025

नज़रिया जीने का: बच्चों में किताबों से पहले जिज्ञासा कैसे जगाएँ


 बच्चों में अध्ययन में रुचि जगाने के लिए जरूरी है कि आप पहले जानने के जिज्ञासा का भाव विकसित करें. जिज्ञासा हीं वह चीज है जो स्मृति धारण में शामिल क्षेत्र, हिप्पोकैम्पस को सक्रिय करके मस्तिष्क को गहन सीखने के लिए तैयार करती है. 

याद रखें. किताबें ज्ञान का सागर होती हैं लेकिन विडम्बना यह है कि आज मोबाइल फोन के  कारण हम उससे कटते जा रहे हैं. लेकिन ज्ञान के उस सागर तक पहुँचने की पहली नाव होती है — जिज्ञासा। इसलिए यह जरूरी है कि हम बच्चों के अंदर जिज्ञासा और ललक पैदा करें. 

अगर बच्चे के मन में जानने की ललक है, तो वह खुद-ब-खुद सीखने के रास्ते खोज लेता है। इसलिए जरूरी है कि हम बच्चों को सिर्फ किताबों का पाठ न पढ़ाएँ, बल्कि उनके अंदर "जानने की चाह" को जगाएँ।



यह वैज्ञानिक रिसर्च में कहंगया गया हैं कि जिज्ञासु बच्चे कुछ पढ़ते हैं तो उन्हें ज़्यादा याद रहता है. जिज्ञासा पढ़ाई को कर्तव्य नहीं, बल्कि खोज जैसा महसूस कराती है.
बच्चों में किताबों का प्रेम तभी जन्म लेता है जब उनके मन में “जिज्ञासा” का बीज बोया जाए। लेकिन इससे भी जरुरी है की कि किताबें पढ़ने से पहले अगर बच्चे में ‘जानने की भूख’ जगा दी जाए, तो वह खुद ज्ञान खोज लेता है। 



हर माता-पिता और शिक्षक को चाहिए कि वे बच्चे को “उत्तर देने वाला” नहीं, बल्कि “सोचने वाला” बनाएं।

याद रखें, किताबें तभी सार्थक बनती हैं, जब बच्चे के भीतर सवाल करने की जिज्ञासा हो अन्यथा किताब की बाते बच्चे कभी आत्मसात नहीं कर पाएंगे. 

बच्चों के लिए ज्ञान की जरुरत है क्योंकि उसके जीवन का बुनियाद हीं ज्ञान पर आधारित है. लेकिन इसके लिए यह जरुरी है कि बच्चे में जाने और जिज्ञासा की  चाह जगाई जाये ।"

मंगलवार, 7 अक्टूबर 2025

नजरिया जीने का: शेर से सीखें जीवन की 5 खास बातें | चाणक्य नीति



शेर केवल जंगल का राजा नहीं है, बल्कि जीवन का शिक्षक भी है और भले हीं हम शेर को हिंसक ताकत के लिए तुलना करते हैं, लेकिन आपको आश्चर्य होगा कि जंगल का राजा शेर सिर्फ ताकत  पर्याय नहीं है.महान विद्वान और विचारक आचार्य चाणक्य ने कहा है कि इंसानों को शेर से यह उत्कृष्ट बात सीखनी चाहिए कि किसी भी कार्य को पूरी शक्ति और लगन के साथ करना चाहिए, चाहे वह छोटा हो या बड़ा.

 ठीक उसी तरह जैसे शेर अपना शिकार पूरी ताकत और एकाग्रता से करता है, इंसान को भी अपने लक्ष्य को पाने के लिए अपने पूरे बल और ध्यान से प्रयास करना चाहिए.

तो आइए जानते हैं शेर से मिलने वाली 5 खास शिक्षाएँ…"

1. साहस और आत्मविश्वास

शेर सिर्फ ताकत बल का पर्याय नहीं है बल्कि इसके  अतिरिक्त भी हम इंसानों को सीखने के लिए एक शेर से काफी कुछ है. जी हाँ, चाहे जंगल का सबसे बड़ा जीव न हो, लेकिन उसका आत्मविश्वास ही उसे राजा बनाता है। आचार्य चाणक्य कहते हैं कि अगर इंसान सफल होना चाहता है तो उसे यह गाँठ बांध लेना चाहिए कि साहस ही सफलता की कुंजी है और  जीवन में डर नहीं, आत्मविश्वास लेकर आगे बढ़ना चाहिए। और आत्मविश्वास  शेर की पहली निशानी है जो उसे शिकार करने में उसे मदद करता है. 

2. सही समय पर वार करना

सिर्फ ताकत होने से हीं शेर अपना शिकार नहीं करता बल्कि वह इसके लिए रणनीति और इन्तजार भी करता है. शेर कभी बिना सोचे समझे शिकार नहीं करता। वह धैर्य रखकर सही मौके का इंतजार करता है। चाणक्य भी कहते हैं – 'कार्य की सफलता समय पर निर्भर है।' हमें भी हर काम सोच-समझकर सही समय पर करना चाहिए।"

3. एकाग्रता और फोकस

"शेर जब शिकार करता है, तो उसका पूरा ध्यान केवल एक लक्ष्य पर होता है। उसी तरह चाणक्य नीति कहती है – 'लक्ष्यभ्रष्ट व्यक्ति कभी सफल नहीं होता।' हमें भी अपने जीवन में एकाग्रता बनाए रखनी चाहिए।"

4. मेहनत और तैयारी

"शेर बिना मेहनत किए कभी भोजन नहीं करता। उसे हर बार शिकार के लिए पूरी ताकत झोंकनी पड़ती है। चाणक्य कहते हैं – 'मेहनत करने वाला ही विजय प्राप्त करता है।' हमें भी हर लक्ष्य के लिए पूरी तैयारी करनी चाहिए।"

5. स्वाभिमान और नेतृत्व

"शेर अकेले भी शिकार करता है और झुंड के साथ भी। लेकिन वह कभी अपना स्वाभिमान नहीं खोता। चाणक्य नीति में लिखा है – 'स्वाभिमान खोने वाला व्यक्ति दूसरों का दास बन जाता है।' हमें भी अपने आत्मसम्मान और नेतृत्व क्षमता को बनाए रखना चाहिए।"

शुक्रवार, 26 सितंबर 2025

नजरिया जीने का: स्वामी विवेकानंद की इस कोट्स को बना लो जीवन का आधार



स्वामी विवेकानंद...महान भारतीय भिक्षु, विद्वान और प्रख्यात आध्यात्मिक नेता, जिनके विचारों और शब्दों का विशेष महत्व है...यह स्वामी विवेकानंद और उनकी शिक्षाएँ ही थीं, जिन्होंने भारत के बारे में दुनिया की धारणा को बदलने में मदद की...वह व्यक्ति जिसने न केवल युवाओं को प्रेरित किया, बल्कि अपने प्रेरक शब्दों से मानवता को नई ऊँचाईयाँ दीं।

12 जनवरी 1863 को कलकत्ता में जन्मे, प्रख्यात विद्वान और प्रसिद्ध वक्ता विवेकानंद ने अपनी असीम शक्ति और क्षमता के साथ चुनौतियों और कठिनाइयों का सामना करने के लिए युवाओं को जागृत करने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया.....पहले उनका नाम नरेंद्रनाथ दत्ता था, और वे पिता विश्वनाथ दत्ता और माँ भुवनेश्वरी देवी की आठवीं संतान थे।

सपनों और हकीकत के बीच की दूरी है एक्शन

वे अपनी शिक्षा के लिए जाने जाते हैं, जिसमें प्रज्वलित करने की शक्ति है और जो पूरी ऊर्जा से भरपूर है। स्वामी विवेकानंद, भारत के सबसे सम्मानित आध्यात्मिक नेताओं और सुधारकों में से एक हैं, जिनके विचार लाखों लोगों को प्रेरित करने के लिए पर्याप्त हैं। स्वामी विवेकानंद, जिनका जन्म नरेंद्रनाथ दत्त के रूप में हुआ था, 19वीं सदी के अंत में हिंदू धर्म को एक प्रमुख विश्व धर्म का दर्जा दिलाने के लिए जाने जाते हैं।

विवेकानंद ने हमेशा लोगों को अपने अंदर की बुराई से बचने और ईर्ष्या और अहंकार को हमेशा त्यागने का सुझाव दिया। विवेकानंद हमेशा युवाओं से कहते थे कि हिम्मत रखो और काम करो। वह स्वस्थ और मजबूत युवाओं के बारे में चिंतित थे, जिनके हाथ और कंधे मजबूत हों।

विवेकानंद ने हमेशा दूसरों से पहले खुद को जानने पर जोर दिया है....वे कहते हैं, "दिन में एक बार खुद से बात करें, अन्यथा आप दुनिया में एक बेहतरीन व्यक्ति से मिलने से चूक सकते हैं।"

इसके अलावा विवेकानंद कहते हैं, "जब तक आप खुद पर विश्वास नहीं करते, तब तक आप ईश्वर पर विश्वास नहीं कर सकते..."

भगवत गीता से सीखें सफलता के लिए जीवन मे धैर्य का महत्व

स्वामी विवेकानंद के प्रेरक विचार: प्रेरक उद्धरण जानें

"अपने जीवन में जोखिम उठाएँ...अगर आप जीतते हैं, तो आप नेतृत्व करते हैं, अगर आप हारते हैं तो आप मार्गदर्शन कर सकते हैं।"- स्वामी विवेकानंद

स्वामी विवेकानंद कहते हैं, किसी भी चीज़ से मत डरो, तुम अद्भुत काम करोगे। यह निर्भयता ही है जो एक पल में भी स्वर्ग ला देती है..

सच्चे रिश्ते सुविधा से नहीं, समर्पण से बनते हैं

गुरुवार, 25 सितंबर 2025

उद्योगे नास्ति दारिद्रयं जपतो नास्ति पातकम्। मौनेन कलहो नास्ति जागृतस्य च न भयम्॥


महान दार्शनिक, विद्वान और कूटनीति के जनक चाणक्य का मूल्यांकन आज तक कर पाना संभव नहीं हुआ है क्योंकि उनके द्वारा दिए गए सूक्तियाँ  आज भी प्रासंगिक हैं और लोग उनके पाठ कर उनसे लाभ उठा रहे हैं। 

"उद्योगे नास्ति दारिद्रयं जपतो नास्ति पातकम्। 

मौनेन कलहो नास्ति जागृतस्य च न भयम्॥"

विख्यात विद्वान चाणक्य का यह श्लोक इंसानों के विविध चारित्रिक विशेषताओं और प्रति दिन के व्यवहार मे लाए जाने वाले विचार का प्रतिनिधित्व करता है। चाणक्य का साफ कहना है कि परिश्रम करने वाले व्यक्ति को कभी दरिद्रता (गरीबी) का सामना नहीं करना पड़ता। अर्थात व्यक्ति को अगर दरिद्रता और गरीबी से मुक्ति पाना है तो उसे उद्योग करने के अलावा और कोई उपाय नहीं है क्योंकि उद्यम से हीं दरिद्रता हो सकती है।

 साथ ही चाणक्य का कहना है कि  ईश्वर के नाम का जप करने वाले को पाप नहीं लगता। अर्थात  पाप से मुक्ति के लिए इंसान को जप अर्थात ईश्वरण कि शरण मे जाना चाहिए। 

कलह के संबंध मे चाणक्य का कहना है कि कलह को अगर शांत करना चाहते हैं तो मौन रहना हीं एकमात्र उपाय है क्योंकि कलह या झगड़ा कि स्थिति मे बोलते रहने से बात बिगड़ेगी हीं। वहीं चाणक्य का कहना है कि  जागते रहने से कभी भी भय नहीं होता है। 

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कठिन समय से कायर भागते हैं, सामना करने की कला सीखें 


शनिवार, 20 सितंबर 2025

नजरिया जीने का: चाणक्य से सीखें कैसे पैरेंट होते हैं अपनी बच्चों के दुश्मन



आचार्य चाणक्य जिनका आज तक मूल्याङ्कन नहीं किया जा सका और जो वास्तव में ऐसे विलक्षण विद्वान थे जो इस धरती के वास्तविक राजा की तलाश करके चन्द्रगुप्त मौर्य के नेतृत्व में मौर्य वंश का स्थापना किया था. 

चाणक्य न केवल एक महान अर्थशास्त्री, शिक्षक और कूटनीतिज्ञ थे, बल्कि उन्होंने ‘चाणक्य नीति’ नामक ग्रंथ के माध्यम से जीवन के हर पहलू को सरल, सटीक और प्रभावशाली तरीके से समझाया है. 

 बच्चों के शिक्षा के सम्बन्ध में उनका कहना था कि जो माता-पिता अपने पुत्रों को शिक्षित नहीं करते उनके शत्रु होते हैं; क्योंकि हंसों के बीच सारस की तरह, अज्ञानी पुत्र सार्वजनिक सभा में भी शत्रु होते हैं।

माता शत्रुः पिता वैरी येनवालो न पाठितः।
 न शोभते सभामध्ये हंसमध्ये वको यथा ॥



आचार्य चाणक्य ने उस तरह के माता-पिता को बच्चे का सबसे बड़ा दुश्मन माना है जो अपने ही बच्चे को शिक्षा के आभाव में रखते हैं.बच्चे को न पढ़ानेवाली माता शत्रु तथा पिता वैरी के समान होते हैं । बिना पढ़ा व्यक्ति पढ़े लोगों के बीच में कौए के समान शोभा नहीं पता ।

 चाणक्य के अनुसार वह बच्चे जीवन में हमेशा पीछे छूट जाता है जिसे सही शिक्षा नहीं मिलती है. इसके अलावा जब आप बच्चे को शिक्षा नहीं दिलाते हैं तो उसे समाज में भी किसी से इज्जत नहीं मिलती है. अगर आप अपने बच्चे का दुश्मन नहीं बनना चाहते हैं तो यह काफी जरूरी हो जाता है कि आप उन्हें उचित शिक्षा जरूर दिलाएं.


शुक्रवार, 19 सितंबर 2025

नजरिया जीने का: शक्ति, साहस और विजय की अधिष्ठात्री देवी हैं मां दुर्गा


हिंदू धर्म में माँ दुर्गा को शक्ति, साहस और समृद्धि की देवी माना जाता है और इस दौरान मान दुर्गा के नौ रुपों की पूजा की जाती है.मान दुर्गा त्रिदेवियों (महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती) का सम्मिलित स्वरूप हैं और मान्यताओं के अनुसार मां के इन तीनों स्वरूपों की पूजा की जाती है. माँ दुर्गा शक्ति की दैवी हैं और उन्होनें  ही असुरों का संहार कर धर्म की रक्षा की थी।

माँ की उपासना से जीवन में निडरता, आत्मबल, सुख-समृद्धि और सफलता प्राप्त होती है जो कि हमारे लिए सफलता का माध्यम है. नवरात्रि के नौ दिन देवी के नौ स्वरूपों की पूजा होती है, जो क्रमशः भक्तों को बल, बुद्धि, ज्ञान, भक्ति और मोक्ष प्रदान करते हैं।

याद रखें, शक्ति, साहस और विजय की अधिष्ठात्री देवी हैं मां दुर्गा और जीवन में सफल होने के लिए यह जरूरी है कि आप शक्ति और साहस को अपनाए.

भय के रहते सफलता के बारे में सोचना भी व्यर्थ है और यह मा दुर्गा हीं है जिनकी कृपा से भय से मुक्ति प्राप्त हो सकती है.

 इस वर्ष अर्थात 2025 में नवरात्री में विशेष संयोग है क्योंकि इस वर्ष शरद नवरात्र 10 दिनों का होगा। खास बात कि  9 साल बाद बन रहा एक अद्भुत संयोग है. मान्यता है कि ऐसा संजोग अच्छा और आम लोगों के के लिए शुभ माना जाता है. इसके अतिरिक्त  

इस साल मां दुर्गा का वाहन हाथी है. ऐसी मान्यता है कि हाथी पर मां दुर्गा का आना सुख-समृद्धि और वैभव का प्रतीक माना जाता है, जो कि मंगलकारी होता है.

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बुधवार, 17 सितंबर 2025

नजरिया जीने का: हर मनुष्य को कौए से सीखनी चाहिए ये 5 बातें@चाणक्य नीति


विश्व विख्यात दार्शनिक और चिंतक चाणक्य के विचार आज भी उतने हीं प्रासंगिक हैं जितने की आज से हजारों साल पहले थे. सच तो यह है कि चाणक्य का मूल्याङ्कन आज तक नहीं किया जा सका है. 

चाणक्य ने हमेशा से सीखने अनुशासन पर जोर दिया है. इसी सन्दर्भ में चाणक्य ने कौए से पांच बातों को सीखने पर जोर दिया है  प्रत्येक मानव को जरूर सीखनी चाहिए. 

चाणक्य के अनुसार, कौआ हमेशा अकेला ही अपना भोजन जमा करता है. काम में कभी आलस नहीं दिखाता है. आचार्य चाणक्य के अनुसार, अगर कोई आदमी सफल होना चाहता है तो उसे कौवे से यह गुण सीखना चाहिए. 

कौवे बहुत बुद्धिमान होते हैं। वे चेहरे पहचान सकते हैं, द्वेष रख सकते हैं, और यहाँ तक कि गाड़ियों को भी पहचान सकते हैं। कौवे भोजन छिपाकर रखते हैं, और अगर कोई दूसरा प्राणी उन्हें छिपाते हुए देख ले, तो वे उसे हटा देते हैं।

आचार्य चाणक्य के अनुसार, आदमी अगर कौवे की तरह मेहनती होता है तो वह हमेशा दूसरों से आगे रहता है और जीवन में सफलता प्राप्त करता है. चाणक्य ने कौवे से निम्न पांच बातों को सीखने पर जोर दिया है-

चाणक्य के अनुसार एक कौवे से इन्सानों को ये पाँच बातें  सीखनी चाहिए।

  1. एकांत में मिलन (अपनी पत्नी के साथ); 
  2. साहस; 
  3. उपयोगी वस्तुओं को संग्रहित करना; 
  4. सतर्कता; और
  5.  दूसरों पर आसानी से भरोसा न करना।

मंगलवार, 16 सितंबर 2025

नजरिया जीने का: चाणक्य के अनुसार हमें इन लोगों से सावधान रहनी चाहिए


आचार्य चाणक्य (कौटिल्य) जिन्हें विष्णुगुप्त भी कहा जाता है, न केवल एक महान राजनेता और अर्थशास्त्री थे, बल्कि वे मौर्य वंश के संस्थापक भी थे.जीवन-दर्शन से लेकर राजा और मंत्रिमंडल के लिए लिखें उनके विचार आज भी प्रासंगिक हैं. चाणक्य द्वारा लिखित नीति सूत्र (चाणक्य नीति) किसी भी इंसान को जीने की कला सीखती है. चाणक्य ने स्पष्ट कहा है कि अगर जीवन में सफलता प्राप्त करना चाहते हो तो हर किसी पर भरोसा करना अनुचित है. उनका कहना था कि गलत व्यक्ति पर विश्वास जीवन को संकट में डाल सकता है और इसके लिए आपको हमेशा सावधान रहना चाहिए.

आइये जानते हैं कि चाणक्य नीति के अनुसार हमें किन लोगों सेसावधान रहना चाहिए और किन पर कभी भरोसा नहीं करना चाहिए।



दुर्बल चरित्र वाले लोग

चाणक्य कहते हैं कि हमें दुर्बल और कमजोर चरित्र वालों से हमेशा सावधान रहना चाहिए क्योंकि ऐसे लोग हालात के अनुसार कभी भी पलट सकते हैं। आपको पता होना चाहिए कि इस तरह के लोग हमेशा मित्रता, प्रेम या निष्ठा का दिखावा करते हैं, लेकिन ज़रूरत पड़ने पर विश्वासघात करने में देर नहीं लगाते।